पंडित श्रीकांत तिवारी जी द्वारा संपन्न
शास्त्रोक्त विधि से काल सर्प दोष शांति एवं नाग देवता पूजन अनुष्ठान
16+ वर्षों का अनुभव · M.A. संस्कृत · काशी की वैदिक परंपरा · Online & Offline Services
काल सर्प दोष निवारण पूजा राहु-केतु की कुंडली में स्थिति से उत्पन्न अशुभ प्रभावों को शांत करने, जीवन की रुकी हुई प्रगति को गति देने एवं मानसिक-आर्थिक स्थिरता स्थापित करने हेतु किया जाने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।
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काल सर्प दोष वैदिक ज्योतिष का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं चर्चित विषय है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के समस्त ग्रह राहु एवं केतु के मध्य स्थित हो जाते हैं, तो इस स्थिति को काल सर्प दोष कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह स्थिति जीवन के अनेक क्षेत्रों — विवाह, संतान, करियर, स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति — को प्रभावित करती है।
काल सर्प दोष निवारण पूजा एक विशिष्ट वैदिक अनुष्ठान है जिसका उद्देश्य राहु-केतु की अशुभ युति से उत्पन्न प्रभावों को शांत करना तथा नाग देवता की कृपा प्राप्त करना है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह पूजा संकल्प, नाग पूजन, महामृत्युंजय मंत्र जाप एवं हवन के माध्यम से संपन्न की जाती है। राहु-केतु को छाया ग्रह माना गया है, इसीलिए इनकी शांति जीवन में निरंतरता एवं स्थिरता हेतु आवश्यक मानी जाती है।
शास्त्रों में काल सर्प दोष के 12 प्रमुख प्रकार बताए गए हैं — अनंत, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर एवं शेषनाग काल सर्प दोष — जो भाव-स्थिति के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रभाव डालते हैं। काल सर्प दोष निवारण पूजा में महामृत्युंजय मंत्र, नाग गायत्री मंत्र एवं राहु-केतु शांति मंत्र का विधिपूर्वक पाठ किया जाता है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी इस संपूर्ण प्रक्रिया को वैदिक परंपरा एवं काशी की विद्वत्ता के अनुसार संपन्न कराते हैं। संकल्प के साथ आरंभ होकर, नाग प्रतिमा पूजन, मंत्र जाप एवं पूर्णाहुति तक — प्रत्येक चरण शास्त्रोक्त क्रम में सम्पन्न किया जाता है, जिससे अनुष्ठान की प्रामाणिकता एवं प्रभाव सुनिश्चित होता है।
Online Kaal Sarp Puja की सुविधा के माध्यम से पंडित श्रीकांत तिवारी जी देश-विदेश के श्रद्धालुओं को यह अनुष्ठान उनके घर बैठे ही संपन्न करवाने की सेवा प्रदान करते हैं। Live Streaming, Sankalp एवं Prasad Delivery के माध्यम से यह अनुष्ठान पूर्णतः प्रामाणिक रूप से किया जाता है।
यह पूजा विशेष रूप से उन जातकों के लिए अनुशंसित है जिनकी कुंडली में काल सर्प दोष की पुष्टि हुई हो, जो जीवन में निरंतर रुकावटों, विलंबित सफलता अथवा अकारण भय का अनुभव कर रहे हों।
यह अनुष्ठान वैदिक ज्योतिष की गहनतम ग्रह-शांति परंपरा पर आधारित है। प्रत्येक तत्व का शास्त्रीय महत्व है।
वैदिक ज्योतिष, ग्रह-शांति परंपरा एवं नाग पूजन में काल सर्प दोष निवारण पूजा का स्थान अत्यंत उच्च है।
वैदिक ज्योतिष में राहु एवं केतु को छाया ग्रह माना गया है। जब समस्त ग्रह इनके मध्य आ जाते हैं, तो कुंडली में काल सर्प दोष माना जाता है, और इसके निवारण हेतु यह पूजा शास्त्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है।
नाग गायत्री मंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र के विधिपूर्वक जाप से राहु-केतु प्रसन्न होते हैं। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, इससे जातक के जीवन में स्थिरता एवं प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
Vedic Rituals के माध्यम से मंत्रों की ध्वनि एवं हवन की अग्नि कुंडली के अशुभ प्रभावों को शांत करती है। काल सर्प दोष निवारण पूजा में प्रयुक्त मंत्र अत्यंत शक्तिशाली एवं प्रभावकारी माने जाते हैं।
काल सर्प दोष निवारण पूजा करियर, विवाह एवं महत्वपूर्ण कार्यों में हो रही अनावश्यक देरी को दूर करने में अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। इससे जीवन में गति एवं स्पष्टता आती है।
अकारण भय, बुरे स्वप्न एवं मानसिक बेचैनी की स्थापना हेतु काल सर्प दोष निवारण पूजा अत्यंत लाभदायक मानी जाती है। यह पूजा मन के वातावरण को शुद्ध करती है एवं भीतरी शांति लाती है।
नाग देवता की पूजा से संतान-संबंधी बाधाएँ दूर होती हैं एवं स्वास्थ्य में सुधार आता है। यह आंतरिक जागरण एवं आत्मबल की प्रक्रिया को भी गति देता है।
जीवन के विभिन्न अवस्थाओं में यह अनुष्ठान विशेष रूप से फलदायी होता है।
जब कुंडली विश्लेषण में काल सर्प दोष की पुष्टि हो जाए, तब यह पूजा करवाना अत्यंत आवश्यक माना जाता है, जिससे जीवन में स्थिरता बने।
जब उचित प्रयासों के बावजूद विवाह, नौकरी अथवा महत्वपूर्ण कार्यों में बार-बार देरी हो, तब काल सर्प दोष निवारण पूजा बाधाओं को दूर करने में सहायक मानी जाती है।
निरंतर अकारण भय, बेचैनी एवं बुरे स्वप्न की स्थिति में यह अनुष्ठान मानसिक शांति एवं भीतरी स्थिरता स्थापित करने में सहायक है।
संतान प्राप्ति में देरी अथवा संतान के स्वास्थ्य-संबंधी समस्याओं की स्थिति में नाग देवता की पूजा विशेष रूप से अनुशंसित मानी जाती है।
दीर्घकालिक एवं अकारण स्वास्थ्य-समस्याओं की पुनरावृत्ति होने पर पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार यह पूजा सुरक्षा एवं स्वास्थ्य-लाभ में सहायक मानी जाती है।
नौकरी, व्यवसाय अथवा महत्वपूर्ण कार्यों में निरंतर रुकावट आने पर राहु-केतु की शांति हेतु यह पूजा विशेष रूप से अनुशंसित है।
राहु-केतु शांति मंत्र के पाठ सहित यह पूजा आर्थिक स्थिरता एवं ऋण-मुक्ति प्राप्त करने के इच्छुक साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
नाग पंचमी तथा श्रावण मास इस पूजा के लिए विशेष फलदायी माने जाते हैं। पंडित जी कुंडली के अनुसार उचित मुहूर्त निर्धारित करते हैं।
जब साधक काल सर्प दोष के प्रकार एवं प्रभाव की पुष्टि चाहें, तब यह पूजा एवं ज्योतिषीय परामर्श सर्वोत्तम माध्यम है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, ये समस्याएँ अक्सर राहु-केतु के असंतुलन का संकेत देती हैं।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, जब उचित योग्यता एवं प्रयासों के बावजूद विवाह, नौकरी अथवा महत्वपूर्ण कार्य संपन्न न हो पाएँ, तो यह स्थिति प्रायः कुंडली में काल सर्प दोष का संकेत होती है। यह पूजा इस अवरोध को दूर करने में सहायक मानी जाती है।
बिना किसी ठोस कारण के निरंतर भय, चिंता एवं बुरे स्वप्न आना काल सर्प दोष के अशुभ प्रभाव का संकेत हो सकता है। यह पूजा मानसिक स्थिरता एवं भीतरी शांति स्थापित करती है।
स्वभाव में स्थिरता की कमी, बार-बार नौकरी बदलना अथवा व्यवसाय में अनिश्चितता राहु-केतु के असंतुलन का परिणाम मानी जाती है। Vedic Rituals के माध्यम से नाग पूजन करियर में स्थिरता लाता है।
अकारण एवं बार-बार लौटने वाली स्वास्थ्य-समस्याएँ काल सर्प ग्रह के अशुभ प्रभाव से जोड़ी जाती हैं। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार नाग पूजन इन समस्याओं में सहायक माना जाता है।
संतान प्राप्ति में देरी अथवा संतान के स्वास्थ्य की समस्याएँ भी काल सर्प दोष से संबद्ध मानी जाती हैं। नियमित नाग पूजन से इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।
निरंतर आर्थिक उलझनें एवं धन-संबंधी अस्थिरता राहु-केतु के असंतुलन का संकेत माना गया है। राहु-केतु शांति मंत्र का पाठ इस समस्या के निवारण में सहायक है।
विवाह से पूर्व कुंडली मिलान में काल सर्प दोष का सामने आना अनेक प्रस्तावों को रुकावट में डाल देता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी विधिपूर्वक पूजा द्वारा इस दोष के प्रभाव को शांत करने में मार्गदर्शन देते हैं।
राहु-केतु के असंतुलन से आत्मविश्वास में कमी, अनिर्णय की स्थिति एवं भीतरी बेचैनी अनुभव होती है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी द्वारा संपन्न पूजा इस आंतरिक स्थिरता को पुनः स्थापित करती है।
यह अनुष्ठान जीवन के हर पक्ष को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
विवाह, करियर एवं महत्वपूर्ण कार्यों में आ रही बाधाएँ एवं विलंब दूर होते हैं। जीवन में स्पष्टता एवं गति आती है।
कुंडली में उपस्थित काल सर्प दोष के नकारात्मक प्रभावों का निवारण होता है एवं जीवन में दैवीय सुरक्षा-कवच स्थापित होता है।
अकारण भय, चिंता एवं बेचैनी में उल्लेखनीय कमी आती है तथा मन में गहरी स्थिरता स्थापित होती है।
नाग देवता की कृपा से संतान प्राप्ति में सहजता आती है एवं संतान के स्वास्थ्य में सुधार होता है।
राहु-केतु शांति मंत्र के प्रभाव से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में स्थिरता एवं उन्नति आती है।
नाग पूजन से व्यक्ति में आत्मविश्वास, साहस एवं निर्णय-शक्ति का संचार होता है।
दीर्घकालिक एवं अकारण स्वास्थ्य-समस्याओं में सुधार होता है। दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्राप्त होने की मान्यता है।
नौकरी एवं करियर में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं तथा कार्यक्षेत्र में स्थिरता एवं प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
नियमित नाग पूजन एवं मंत्र-जाप से साधक में आध्यात्मिक दृष्टि स्पष्ट होती है एवं जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण विकसित होता है।
ये सामान्य आध्यात्मिक अभ्यास हैं जो जीवन में सकारात्मकता लाते हैं।
नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करें एवं दूध, धान का लावा अर्पित करें। इससे काल सर्प दोष के अशुभ प्रभाव में कमी आती है।
प्रतिदिन प्रातःकाल "ॐ त्र्यंबकं यजामहे..." महामृत्युंजय मंत्र का यथाशक्ति जाप करें। इससे मन में स्थिरता एवं सुरक्षा का भाव बढ़ता है।
सोमवार को शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। यह उपाय राहु-केतु की शांति एवं काल सर्प दोष के निवारण में सहायक माना जाता है।
यथाशक्ति चांदी के नाग-नागिन की पूजा कर बहते जल में विसर्जित करें अथवा दान करें। यह काल सर्प दोष शांति का प्रभावशाली उपाय माना गया है।
घर के पूजा-स्थान में राहु-केतु यंत्र स्थापित करें एवं नियमित रूप से उसकी पूजा करें। यह ग्रहों के अशुभ प्रभाव को संतुलित करने में सहायक है।
प्रतिदिन अथवा नाग पंचमी के अवसर पर नाग गायत्री मंत्र का पाठ करें। यह नाग देवता की कृपा प्राप्त करने में सहायक माना जाता है।
अकारण भय एवं नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण रखने का अभ्यास करें। सकारात्मक चिंतन राहु-केतु की ऊर्जा को संतुलित दिशा में मोड़ता है।
प्रतिदिन कम से कम 10-15 मिनट शांत मन से ध्यान करें। गहरी साँस लेते हुए मन को स्थिर रखने का अभ्यास करें। इससे मानसिक संतुलन प्राप्त होता है।
महत्वपूर्ण सूचना: ये सामान्य आध्यात्मिक अभ्यास हैं जो सकारात्मक जीवनशैली के अंग हैं। ये व्यक्तिगत Spiritual Guidance एवं विशेषज्ञ द्वारा संपन्न किए जाने वाले Vedic Rituals का विकल्प नहीं हैं। व्यक्तिगत समस्याओं एवं कुंडली विश्लेषण हेतु पंडित श्रीकांत तिवारी जी से परामर्श अवश्य लें।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी को काल सर्प दोष निवारण, कुंडली विश्लेषण एवं ग्रह-शांति पूजाओं में 16 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव प्राप्त है। उनके मार्गदर्शन से सैकड़ों जातकों ने जीवन में स्थिरता एवं प्रगति प्राप्त की है।
M.A. संस्कृत की उच्च शिक्षा के साथ उन्होंने वैदिक ज्योतिष, मंत्रशास्त्र, पूजा-विधान एवं ग्रह-गणना की गहन शिक्षा प्राप्त की है। शास्त्रों की प्रामाणिक समझ उनकी सेवाओं को विशेष विश्वसनीय बनाती है।
काशी (वाराणसी) भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठित वैदिक विद्या का केंद्र है। पंडित जी ने काशी की इस महान परंपरा से दीक्षा लेकर काल सर्प दोष निवारण पूजा की समग्र विद्या अर्जित की है।
Online Kaal Sarp Puja की सुविधा से देश-विदेश के श्रद्धालु भी इस अनुष्ठान का लाभ उठा सकते हैं। Live Streaming, Video Call के माध्यम से संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी रूप से संपन्न होती है।
प्रत्येक जातक की कुंडली एवं काल सर्प दोष का प्रकार भिन्न होता है। पंडित जी पूजा के पूर्व एवं पश्चात व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श प्रदान करते हैं जिससे साधक को अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी प्रत्येक चरण को शास्त्रोक्त विधि से संपन्न कराते हैं।
पूजा के प्रारंभ से पूर्व पंडित श्रीकांत तिवारी जी साधक की जन्म-कुंडली का विश्लेषण करते हैं एवं काल सर्प दोष के प्रकार की पुष्टि करते हैं। इसके आधार पर ही पूजा का विधान एवं संकल्प निर्धारित किया जाता है।
साधक के नाम, गोत्र एवं कामना सहित नाग देवता के समक्ष विधिपूर्वक संकल्प लिया जाता है। यह संकल्प पूजा का आधार है और इसके बिना अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
पूजन के लिए पवित्र स्थान की शुद्धि, नाग प्रतिमा एवं राहु-केतु यंत्र की स्थापना, चांदी के नाग-नागिन का संयोजन एवं सभी आवश्यक सामग्री विधिपूर्वक एकत्रित की जाती है। प्रत्येक सामग्री का शास्त्रीय महत्व है।
नाग देवता एवं भगवान शिव का षोडशोपचार (सोलह उपचार) से विधिपूर्वक पूजन किया जाता है। आह्वान, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि सभी उपचार शास्त्रोक्त क्रम से अर्पित किए जाते हैं।
काल सर्प दोष निवारण पूजा का केंद्र महामृत्युंजय मंत्र एवं नाग गायत्री मंत्र का विधिपूर्वक जाप है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी शास्त्रीय उच्चारण के साथ निर्धारित संख्या में यह जाप संपन्न करते हैं, जिसमें राहु-केतु शांति मंत्र भी सम्मिलित है।
शास्त्रोक्त विधि से रुद्राभिषेक संपन्न किया जाता है, जिसमें भगवान शिव को पंचामृत अभिषेक एवं बेलपत्र अर्पित किया जाता है। यह विधान काल सर्प दोष शांति का अत्यंत प्रभावी उपाय माना जाता है।
मंत्र-जाप की समाप्ति के पश्चात हवन-कुंड में अग्नि प्रज्वलित कर नाग मंत्रों के साथ आहुतियाँ दी जाती हैं। घी, तिल, जौ एवं राहु-केतु से संबंधित विशेष सामग्री से हवन संपन्न किया जाता है।
हवन के अंत में नाग देवता को समर्पित पूर्णाहुति दी जाती है। इसके पश्चात शिवजी एवं नाग देवता की महाआरती के साथ अनुष्ठान का समापन होता है। चांदी के नाग-नागिन का बहते जल में विसर्जन कर प्रसाद वितरण किया जाता है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी पूजा के पश्चात साधक को व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान करते हैं — नियमित व्रत-उपाय, सावधानियाँ एवं किस प्रकार नाग देवता की कृपा को जीवन में स्थायी बनाएँ। यह ज्योतिषीय मार्गदर्शन अनुष्ठान को दीर्घकालिक फलदायी बनाता है।
काल सर्प दोष निवारण पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राहु-केतु को शांत करने, जीवन में रुकी हुई प्रगति को गति देने एवं मानसिक स्थिरता स्थापित करने का एक प्रभावशाली माध्यम है। उचित विधि, श्रद्धा एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न किया गया अनुष्ठान साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक माना जाता है।
काल सर्प दोष वैदिक ज्योतिष की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के समस्त ग्रह राहु एवं केतु के मध्य स्थित हो जाते हैं, तो कुंडली में काल सर्प दोष माना जाता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह स्थिति विशेष रूप से जीवन की प्रगति, विवाह, करियर एवं मानसिक शांति को प्रभावित करती है, परंतु दोष के प्रकार (अनंत, कुलिक, वासुकी आदि) के अनुसार इसकी तीव्रता एवं प्रभाव भिन्न होता है। इसीलिए कुंडली का विस्तृत विश्लेषण करवाना आवश्यक है। राहु-केतु की छाया-ग्रह प्रकृति इस दोष का मूल कारण मानी जाती है।
काल सर्प दोष निवारण पूजा के लाभ अत्यंत व्यापक हैं। सर्वप्रथम, यह जीवन में रुकी हुई प्रगति एवं विलंब को दूर करने में सहायक मानी जाती है। मानसिक स्थिरता बढ़ती है, अकारण भय एवं चिंता पर नियंत्रण होता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह पूजा संतान-संबंधी बाधाओं के निवारण, आर्थिक स्थिरता एवं स्वास्थ्य-संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी मानी जाती है। आत्मबल एवं आत्मविश्वास में वृद्धि होती है तथा साधक में स्थिरता जागृत होती है। Kaal Sarp Dosh Puja in Indore में भी व्यापक रूप से की जाती है और यहाँ के श्रद्धालुओं ने इसके अनेक लाभ अनुभव किए हैं।
काल सर्प दोष निवारण पूजा सामान्यतः एक दिन में संपन्न होने वाला अनुष्ठान है, जिसमें लगभग पाँच से छह घंटे का समय लगता है। इसमें संकल्प, षोडशोपचार पूजन, महामृत्युंजय एवं नाग गायत्री मंत्र-जाप, रुद्राभिषेक तथा हवन सम्मिलित होते हैं। पंडित श्रीकांत तिवारी जी प्रत्येक चरण को धैर्यपूर्वक एवं विधिवत संपन्न कराते हैं, जिससे अनुष्ठान की प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है। पूजा का समय शुभ मुहूर्त के अनुसार पूर्व-निर्धारित किया जाता है। Online Kaal Sarp Puja में भी यही समय-सीमा लागू होती है। विस्तृत जानकारी के लिए पंडित जी से सीधे परामर्श लें।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, Online Kaal Sarp Puja पूर्णतः प्रभावशाली होती है। वैदिक शास्त्रों में संकल्प एवं श्रद्धा को सर्वाधिक महत्व दिया गया है — न कि केवल शारीरिक उपस्थिति को। Online Puja में साधक का संकल्प लिया जाता है, उनके नाम, गोत्र एवं जन्म-विवरण सहित विधिपूर्वक पूजा संपन्न की जाती है। Live Streaming के माध्यम से साधक पूरे अनुष्ठान का साक्षी बनते हैं। Vedic Rituals की शक्ति मंत्रों में होती है, जो स्थान-निरपेक्ष हैं। पंडित जी Indore एवं देश-विदेश के श्रद्धालुओं को Online Puja की सेवा प्रदान कर रहे हैं और अनेक परिवारों ने Online Kaal Sarp Puja से उत्कृष्ट अनुभव प्राप्त किया है।
काल सर्प दोष निवारण पूजा के लिए सर्वाधिक शुभ दिन नाग पंचमी एवं श्रावण मास माना जाता है, क्योंकि इस अवधि में नाग देवता का विशेष प्रभाव होता है। इसके अतिरिक्त, जब कुंडली विश्लेषण में काल सर्प दोष की पुष्टि हो, अथवा जीवन में निरंतर रुकावटें आ रही हों, तब भी मुहूर्त देखकर यह पूजा करवाई जा सकती है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, सोमवार का दिन भी शिव-नाग पूजन हेतु शुभ माना जाता है। वे ज्योतिष के आधार पर प्रत्येक साधक के लिए उचित मुहूर्त निर्धारित करते हैं। Kaal Sarp Dosh Puja in Indore वर्षभर की जा सकती है, परंतु नाग पंचमी एवं विशेष ज्योतिषीय मुहूर्त का काल अधिक प्रभावशाली माना जाता है।
काल सर्प दोष निवारण पूजा में अनेक प्रकार की वैदिक सामग्री का उपयोग होता है। इनमें प्रमुख हैं — चांदी के नाग-नागिन, राहु-केतु यंत्र, शिवलिंग, बेलपत्र, पंचामृत, धान का लावा, दूध, घी, तिल, जौ, हवन सामग्री, कुमकुम, अबीर-गुलाल एवं नैवेद्य आदि। पंडित श्रीकांत तिवारी जी स्वयं सामग्री की व्यवस्था करते हैं एवं साधक को अलग से कुछ विशेष वस्तुएँ लाने का निर्देश देते हैं। Online Kaal Sarp Puja में सामग्री की व्यवस्था पंडित जी द्वारा की जाती है। पूजा की सामग्री की पूर्ण सूची परामर्श के दौरान प्रदान की जाती है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, काल सर्प दोष निवारण पूजा विशेष रूप से उन जातकों के लिए अनुशंसित है जिनकी कुंडली में काल सर्प दोष की पुष्टि हुई हो। इसके अतिरिक्त, जिनके जीवन में निरंतर रुकावटें हों, विवाह अथवा करियर में बार-बार विलंब हो रहा हो, अकारण भय एवं मानसिक बेचैनी हो, संतान-संबंधी बाधाएँ हों या आर्थिक अस्थिरता बनी रहती हो — वे भी इस पूजा से विशेष लाभ उठा सकते हैं। यह पूजा सभी वर्गों के लिए उपयुक्त है। किसी भी संशय की स्थिति में पंडित जी से कुंडली परामर्श लेना उत्तम है।
शास्त्रों के अनुसार काल सर्प दोष के 12 प्रमुख प्रकार बताए गए हैं — अनंत, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर एवं शेषनाग काल सर्प दोष। प्रत्येक प्रकार कुंडली में राहु की भाव-स्थिति के अनुसार निर्धारित होता है एवं इसका प्रभाव जीवन के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों — विवाह, संतान, स्वास्थ्य, करियर अथवा मानसिक शांति — पर पड़ता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी कुंडली विश्लेषण के माध्यम से दोष के सटीक प्रकार की पुष्टि कर उपयुक्त पूजा-विधान का निर्धारण करते हैं।
महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है, जिसका जाप सुरक्षा, स्वास्थ्य-लाभ एवं अकाल-मृत्यु के भय से रक्षा हेतु किया जाता है। नाग गायत्री मंत्र इससे भिन्न है — यह विशेष रूप से नाग देवता की प्रसन्नता एवं राहु-केतु की शांति हेतु किया जाने वाला पाठ है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी स्पष्ट करते हैं कि संपूर्ण काल सर्प दोष निवारण पूजा में दोनों मंत्र — महामृत्युंजय एवं नाग गायत्री — सम्मिलित रूप से संपन्न किए जाते हैं, जिससे अनुष्ठान का प्रभाव अधिकतम होता है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी से काल सर्प दोष निवारण पूजा बुक करना अत्यंत सरल है। आप +91 79995 48900 पर सीधे फोन या WhatsApp संपर्क कर सकते हैं। वे आपकी कुंडली, समस्या एवं उपयुक्त मुहूर्त के आधार पर पूजा की योजना बनाते हैं। Online Kaal Sarp Puja के लिए Video Call पर परामर्श उपलब्ध है। पूजा का संकल्प आपके नाम एवं गोत्र के साथ लिया जाता है। Offline Puja के लिए Indore एवं आसपास के क्षेत्रों में सुविधा उपलब्ध है। पूजा की सामग्री, प्रक्रिया एवं कुंडली परामर्श से संबंधित सभी जानकारी परामर्श के दौरान विस्तार से प्रदान की जाती है। सेवा बुक करने के लिए आज ही संपर्क करें।
यदि आप काल सर्प दोष निवारण पूजा, कुंडली विश्लेषण, नाग पूजन, Online Puja या व्यक्तिगत ज्योतिषीय मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते हैं तो पंडित श्रीकांत तिवारी जी से संपर्क करें।