पंडित श्रीकांत तिवारी जी द्वारा संपन्न
शास्त्रोक्त विधि से मांगलिक दोष शांति एवं मंगल ग्रह पूजन अनुष्ठान
16+ वर्षों का अनुभव · M.A. संस्कृत · काशी की वैदिक परंपरा · Online & Offline Services
मंगल दोष निवारण पूजा मांगलिक दोष के अशुभ प्रभावों को शांत करने, विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने एवं वैवाहिक जीवन में सुख-सामंजस्य स्थापित करने हेतु किया जाने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।
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मंगल दोष, जिसे सामान्यतः मांगलिक दोष कहा जाता है, वैदिक ज्योतिष का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल ग्रह स्थित होता है, तो जातक को मांगलिक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह स्थिति विशेष रूप से वैवाहिक जीवन को प्रभावित करती है।
मंगल दोष निवारण पूजा एक विशिष्ट वैदिक अनुष्ठान है जिसका उद्देश्य मंगल ग्रह को प्रसन्न करना एवं कुंडली में उपस्थित इस दोष के अशुभ प्रभावों को शांत करना है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह पूजा संकल्प, षोडशोपचार पूजन, मंगल मंत्र जाप एवं हवन के माध्यम से संपन्न की जाती है। मंगल ग्रह को साहस, भूमि, रक्त-संबंध एवं विवाह का कारक माना गया है, इसीलिए इसकी अनुकूलता जीवन के इन सभी क्षेत्रों के लिए आवश्यक है।
शास्त्रों में मंगल ग्रह को भौम भी कहा गया है, क्योंकि पौराणिक मान्यता के अनुसार यह ग्रह पृथ्वी से उत्पन्न हुआ है। मंगल दोष निवारण पूजा में मंगल स्तोत्र, मंगल गायत्री मंत्र एवं ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का विधिपूर्वक पाठ किया जाता है। यह अनुष्ठान केवल विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने तक सीमित नहीं, बल्कि साहस, आत्मबल एवं क्रोध-नियंत्रण में भी सहायक माना जाता है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी इस संपूर्ण प्रक्रिया को वैदिक परंपरा एवं काशी की विद्वत्ता के अनुसार संपन्न कराते हैं। संकल्प के साथ आरंभ होकर, मंगल यंत्र पूजन, मंत्र जाप एवं पूर्णाहुति तक — प्रत्येक चरण शास्त्रोक्त क्रम में सम्पन्न किया जाता है, जिससे अनुष्ठान की प्रामाणिकता एवं प्रभाव सुनिश्चित होता है।
Online Mangal Dosh Puja की सुविधा के माध्यम से पंडित श्रीकांत तिवारी जी देश-विदेश के श्रद्धालुओं को यह अनुष्ठान उनके घर बैठे ही संपन्न करवाने की सेवा प्रदान करते हैं। Live Streaming, Sankalp एवं Prasad Delivery के माध्यम से यह अनुष्ठान पूर्णतः प्रामाणिक रूप से किया जाता है।
यह पूजा विशेष रूप से उन जातकों के लिए अनुशंसित है जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष की पुष्टि हुई हो, जो विवाह से पूर्व इसके निवारण की कामना रखते हों, या जिनके वैवाहिक जीवन में निरंतर मतभेद, विलंब अथवा अड़चनें आ रही हों।
यह अनुष्ठान वैदिक ज्योतिष की गहनतम ग्रह-शांति परंपरा पर आधारित है। प्रत्येक तत्व का शास्त्रीय महत्व है।
वैदिक ज्योतिष, ग्रह-शांति परंपरा एवं विवाह-संस्कार में मंगल दोष निवारण पूजा का स्थान अत्यंत उच्च है।
वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को साहस, भूमि एवं विवाह का कारक माना गया है। कुंडली के विशेष भावों में इसकी स्थिति को मांगलिक दोष कहा जाता है, और इसके निवारण हेतु यह पूजा शास्त्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है।
मंगल स्तोत्र एवं मंगल गायत्री मंत्र के विधिपूर्वक जाप से मंगल ग्रह प्रसन्न होते हैं। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, इससे जातक में साहस, आत्मबल एवं स्थिरता का संचार होता है।
Vedic Rituals के माध्यम से मंत्रों की ध्वनि एवं हवन की अग्नि कुंडली के अशुभ प्रभावों को शांत करती है। मंगल दोष निवारण पूजा में प्रयुक्त मंत्र अत्यंत शक्तिशाली एवं प्रभावकारी माने जाते हैं।
मंगल दोष निवारण पूजा विवाह में हो रही देरी, कुंडली मिलान की समस्या एवं वैवाहिक जीवन में मतभेद को दूर करने में अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। इससे दांपत्य जीवन में सामंजस्य स्थापित होता है।
परिवार में अनावश्यक क्रोध, विवाद एवं तनाव की स्थापना हेतु मंगल दोष निवारण पूजा अत्यंत लाभदायक मानी जाती है। यह पूजा गृह के वातावरण को शुद्ध करती है एवं संबंधों में मधुरता लाती है।
मंगल ग्रह की पूजा से व्यक्ति में साहस एवं आत्मविश्वास की वृद्धि होती है, क्रोध पर नियंत्रण होता है एवं निर्णय-क्षमता मजबूत होती है। यह आंतरिक जागरण की प्रक्रिया को भी गति देता है।
जीवन के विभिन्न अवस्थाओं में यह अनुष्ठान विशेष रूप से फलदायी होता है।
जब कुंडली में मांगलिक दोष की पुष्टि हो जाए, तब विवाह से पूर्व यह पूजा करवाना अत्यंत आवश्यक माना जाता है, जिससे वैवाहिक जीवन सुखमय बने।
जब उचित प्रयासों के बावजूद विवाह में बार-बार देरी हो या रिश्ते टूट जाएँ, तब मंगल दोष निवारण पूजा बाधाओं को दूर करने में सहायक मानी जाती है।
वैवाहिक जीवन में निरंतर मतभेद, अनबन एवं अशांति की स्थिति में यह अनुष्ठान संबंधों में सामंजस्य एवं समझ स्थापित करने में सहायक है।
अत्यधिक क्रोध, उतावलापन एवं अधीरता मंगल ग्रह के असंतुलन का संकेत मानी जाती है। यह पूजा स्वभाव में संयम एवं स्थिरता लाने में सहायक है।
त्वचा विकार, रक्त-संबंधी असंतुलन एवं दुर्घटना की पुनरावृत्ति होने पर पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार यह पूजा सुरक्षा एवं स्वास्थ्य-लाभ में सहायक मानी जाती है।
भूमि, संपत्ति अथवा गृह-निर्माण से संबंधित कार्यों में निरंतर रुकावट आने पर मंगल ग्रह की शांति हेतु यह पूजा विशेष रूप से अनुशंसित है।
ऋणमोचन मंगल स्तोत्र के पाठ सहित यह पूजा ऋण-मुक्ति एवं आर्थिक स्थिरता प्राप्त करने के इच्छुक साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
मंगल ग्रह की पूजा के लिए मंगलवार का दिन तथा शुभ मुहूर्त विशेष फलदायी माने जाते हैं। पंडित जी कुंडली के अनुसार उचित मुहूर्त निर्धारित करते हैं।
विवाह की बात आरंभ करने से पूर्व जब साधक कुंडली मिलान एवं मांगलिक दोष की पुष्टि चाहें, तब यह पूजा एवं ज्योतिषीय परामर्श सर्वोत्तम माध्यम है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, ये समस्याएँ अक्सर मंगल ग्रह के असंतुलन का संकेत देती हैं।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, जब उचित आयु, योग्यता एवं प्रयासों के बावजूद विवाह संपन्न न हो पाए, रिश्ते टूट जाएँ या बात आगे न बढ़े, तो यह स्थिति प्रायः कुंडली में मंगल दोष का संकेत होती है। मंगल दोष निवारण पूजा इस अवरोध को दूर करने में सहायक मानी जाती है।
विवाह के पश्चात पति-पत्नी में निरंतर मतभेद, अनबन एवं समझ की कमी होना मांगलिक दोष के अशुभ प्रभाव का संकेत हो सकता है। यह पूजा दांपत्य जीवन में सामंजस्य एवं स्नेह स्थापित करती है।
स्वभाव में अनियंत्रित क्रोध, उतावलापन एवं निर्णयों में जल्दबाज़ी मंगल ग्रह की उग्रता का परिणाम मानी जाती है। Vedic Rituals के माध्यम से मंगल मंत्र-जाप स्वभाव में संयम एवं स्थिरता लाता है।
त्वचा संबंधी समस्याएँ, रक्त-असंतुलन एवं दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति होना मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव से जोड़ा जाता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार मंगल पूजन इन समस्याओं में सहायक माना जाता है।
भूमि-क्रय, गृह-निर्माण अथवा संपत्ति के मामलों में निरंतर बाधा आना भी मंगल दोष से संबद्ध माना जाता है। नियमित मंगल पूजन से भूमि संबंधी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
ऋण से मुक्ति न मिलना अथवा निरंतर आर्थिक उलझनें बने रहना मंगल ग्रह के असंतुलन का संकेत माना गया है। ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ इस समस्या के निवारण में सहायक है।
विवाह से पूर्व कुंडली मिलान में मांगलिक दोष का सामने आना अनेक प्रस्तावों को रुकावट में डाल देता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी विधिपूर्वक पूजा द्वारा इस दोष के प्रभाव को शांत करने में मार्गदर्शन देते हैं।
मंगल ग्रह साहस एवं आत्मबल का कारक है। इसके असंतुलन से आत्मविश्वास में कमी, अनिर्णय की स्थिति एवं भीतरी बेचैनी अनुभव होती है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी द्वारा संपन्न पूजा इस आंतरिक स्थिरता को पुनः स्थापित करती है।
यह अनुष्ठान जीवन के हर पक्ष को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
विवाह में आ रही बाधाएँ एवं विलंब दूर होते हैं। उचित एवं सुयोग्य प्रस्ताव प्राप्त होने की संभावना बढ़ती है।
कुंडली में उपस्थित मंगल दोष के नकारात्मक प्रभावों का निवारण होता है एवं जीवन में दैवीय सुरक्षा-कवच स्थापित होता है।
स्वभाव में संयम आता है, क्रोध एवं अधीरता में उल्लेखनीय कमी आती है तथा मन में गहरी स्थिरता स्थापित होती है।
पति-पत्नी के संबंधों में प्रेम, समझ एवं सहयोग बढ़ता है। वैवाहिक जीवन में स्थायी सुख-शांति स्थापित होती है।
भूमि-क्रय, गृह-निर्माण एवं संपत्ति संबंधी कार्यों में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं एवं सफलता की प्राप्ति होती है।
ऋणमोचन मंगल स्तोत्र के प्रभाव से व्यक्ति को ऋण से मुक्ति मिलती है एवं आर्थिक स्थिति में स्थिरता आती है।
मंगल ग्रह की पूजा से व्यक्ति में आत्मविश्वास, साहस एवं निर्णय-शक्ति का संचार होता है।
त्वचा-विकार एवं रक्त-संबंधी असंतुलन में सुधार होता है। दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्राप्त होने की मान्यता है।
रुके हुए महत्वपूर्ण कार्य पुनः सफलतापूर्वक संपन्न होते हैं एवं जीवन में स्पष्टता आती है।
परिवार में अनावश्यक कलह कम होता है, संबंधों में मधुरता आती है एवं गृह का वातावरण सात्विक बनता है।
नौकरी एवं करियर में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं तथा कार्यक्षेत्र में स्थिरता एवं प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
नियमित मंगल पूजन एवं मंत्र-जाप से साधक में आध्यात्मिक दृष्टि स्पष्ट होती है एवं जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण विकसित होता है।
ये सामान्य आध्यात्मिक अभ्यास हैं जो जीवन में सकारात्मकता लाते हैं।
प्रत्येक मंगलवार व्रत रखें एवं हनुमान जी की पूजा करें। इससे मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव में कमी आती है और साहस-बल में वृद्धि होती है।
प्रतिदिन प्रातःकाल "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" अथवा मंगल गायत्री मंत्र का यथाशक्ति जाप करें। इससे मन में स्थिरता एवं संयम बढ़ता है।
प्रतिदिन अथवा प्रति मंगलवार हनुमान चालीसा का पाठ करें। यह मंगल ग्रह की शांति एवं संकटों के निवारण में अत्यंत सहायक माना जाता है।
मंगलवार को लाल वस्त्र धारण करें। यथाशक्ति भूमि, दाल अथवा ताम्र-पात्र का दान करें। यह मंगल ग्रह को प्रसन्न करने का प्रभावशाली उपाय माना गया है।
मंगलवार को शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। यह उपाय मंगल दोष की शांति एवं वैवाहिक बाधाओं के निवारण में सहायक माना जाता है।
घर के पूजा-स्थान में मंगल यंत्र स्थापित करें एवं नियमित रूप से उसकी पूजा करें। यह मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव को संतुलित करने में सहायक है।
क्रोध एवं उतावलेपन पर नियंत्रण रखने का अभ्यास करें। शांत स्वभाव एवं संयमित वाणी मंगल ग्रह की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ती है।
प्रतिदिन कम से कम 10-15 मिनट शांत मन से ध्यान करें। गहरी साँस लेते हुए मन को स्थिर रखने का अभ्यास करें। इससे मानसिक संतुलन प्राप्त होता है।
महत्वपूर्ण सूचना: ये सामान्य आध्यात्मिक अभ्यास हैं जो सकारात्मक जीवनशैली के अंग हैं। ये व्यक्तिगत Spiritual Guidance एवं विशेषज्ञ द्वारा संपन्न किए जाने वाले Vedic Rituals का विकल्प नहीं हैं। व्यक्तिगत समस्याओं एवं कुंडली विश्लेषण हेतु पंडित श्रीकांत तिवारी जी से परामर्श अवश्य लें।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी को मंगल दोष निवारण, कुंडली विश्लेषण एवं ग्रह-शांति पूजाओं में 16 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव प्राप्त है। उनके मार्गदर्शन से सैकड़ों मांगलिक जातकों ने सुखद वैवाहिक जीवन प्राप्त किया है।
M.A. संस्कृत की उच्च शिक्षा के साथ उन्होंने वैदिक ज्योतिष, मंत्रशास्त्र, पूजा-विधान एवं ग्रह-गणना की गहन शिक्षा प्राप्त की है। शास्त्रों की प्रामाणिक समझ उनकी सेवाओं को विशेष विश्वसनीय बनाती है।
काशी (वाराणसी) भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठित वैदिक विद्या का केंद्र है। पंडित जी ने काशी की इस महान परंपरा से दीक्षा लेकर मंगल दोष निवारण पूजा की समग्र विद्या अर्जित की है।
Online Mangal Dosh Puja की सुविधा से देश-विदेश के श्रद्धालु भी इस अनुष्ठान का लाभ उठा सकते हैं। Live Streaming, Video Call के माध्यम से संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी रूप से संपन्न होती है।
प्रत्येक जातक की कुंडली एवं परिस्थिति भिन्न होती है। पंडित जी पूजा के पूर्व एवं पश्चात व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श प्रदान करते हैं जिससे साधक को अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी प्रत्येक चरण को शास्त्रोक्त विधि से संपन्न कराते हैं।
पूजा के प्रारंभ से पूर्व पंडित श्रीकांत तिवारी जी साधक की जन्म-कुंडली का विश्लेषण करते हैं एवं मंगल दोष की पुष्टि करते हैं। इसके आधार पर ही पूजा का विधान एवं संकल्प निर्धारित किया जाता है।
साधक के नाम, गोत्र एवं कामना सहित मंगल देव के समक्ष विधिपूर्वक संकल्प लिया जाता है। यह संकल्प पूजा का आधार है और इसके बिना अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
पूजन के लिए पवित्र स्थान की शुद्धि, मंगल यंत्र की स्थापना, शिवलिंग रूपी मंगलदेव का श्रृंगार एवं सभी आवश्यक सामग्री का विधिपूर्वक संयोजन किया जाता है। प्रत्येक सामग्री का शास्त्रीय महत्व है।
मंगल देव का षोडशोपचार (सोलह उपचार) से विधिपूर्वक पूजन किया जाता है। आह्वान, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि सभी उपचार शास्त्रोक्त क्रम से अर्पित किए जाते हैं।
मंगल दोष निवारण पूजा का केंद्र मंगल स्तोत्र एवं मंगल गायत्री मंत्र का विधिपूर्वक जाप है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी शास्त्रीय उच्चारण के साथ निर्धारित संख्या में यह जाप संपन्न करते हैं, जिसमें ऋणमोचन मंगल स्तोत्र भी सम्मिलित है।
शास्त्रोक्त विधि से भात पूजन संपन्न किया जाता है, जिसमें मंगल देव, भगवान गणेश एवं माता पार्वती की पूजा कर पंचामृत अभिषेक एवं चावल अर्पित किया जाता है। यह विधान मंगल दोष शांति का अत्यंत प्रभावी उपाय माना जाता है।
मंत्र-जाप की समाप्ति के पश्चात हवन-कुंड में अग्नि प्रज्वलित कर मंगल मंत्रों के साथ आहुतियाँ दी जाती हैं। घी, तिल, जौ एवं मंगल ग्रह से संबंधित विशेष सामग्री से हवन संपन्न किया जाता है।
हवन के अंत में मंगल देव को समर्पित पूर्णाहुति दी जाती है। इसके पश्चात शिवजी एवं मंगलदेव की महाआरती के साथ अनुष्ठान का समापन होता है एवं प्रसाद वितरण किया जाता है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी पूजा के पश्चात साधक को व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान करते हैं — कुंडली मिलान में सावधानी, नियमित व्रत-उपाय एवं किस प्रकार मंगल देव की कृपा को जीवन में स्थायी बनाएँ। यह ज्योतिषीय मार्गदर्शन अनुष्ठान को दीर्घकालिक फलदायी बनाता है।
मंगल दोष निवारण पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मंगल ग्रह को प्रसन्न करने, वैवाहिक जीवन में सामंजस्य स्थापित करने एवं आत्मबल जागृत करने का एक प्रभावशाली माध्यम है। उचित विधि, श्रद्धा एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न किया गया अनुष्ठान साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक माना जाता है।
मंगल दोष वैदिक ज्योतिष की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल ग्रह स्थित होता है, तो उस व्यक्ति को "मांगलिक" कहा जाता है एवं उसकी कुंडली में मंगल दोष माना जाता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह स्थिति विशेष रूप से वैवाहिक जीवन को प्रभावित करती है, परंतु प्रत्येक भाव में इसकी तीव्रता एवं प्रभाव भिन्न होता है। इसीलिए कुंडली का विस्तृत विश्लेषण करवाना आवश्यक है। मंगल ग्रह की उग्र प्रकृति इस दोष का मूल कारण मानी जाती है।
मंगल दोष निवारण पूजा के लाभ अत्यंत व्यापक हैं। सर्वप्रथम, यह विवाह में आ रही बाधाओं एवं विलंब को दूर करने में सहायक मानी जाती है। दांपत्य जीवन में सामंजस्य एवं समझ बढ़ती है, क्रोध एवं अधीरता पर नियंत्रण होता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह पूजा भूमि-संबंधी कार्यों में सफलता, ऋण से मुक्ति एवं स्वास्थ्य-संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी मानी जाती है। साहस एवं आत्मबल में वृद्धि होती है तथा साधक में आत्मविश्वास जागृत होता है। Mangal Dosh Puja in Indore में भी व्यापक रूप से की जाती है और यहाँ के श्रद्धालुओं ने इसके अनेक लाभ अनुभव किए हैं।
मंगल दोष निवारण पूजा सामान्यतः एक दिन में संपन्न होने वाला अनुष्ठान है, जिसमें लगभग पाँच से छह घंटे का समय लगता है। इसमें संकल्प, षोडशोपचार पूजन, मंगल स्तोत्र एवं मंत्र-जाप, मांगलिक भात पूजन तथा हवन सम्मिलित होते हैं। पंडित श्रीकांत तिवारी जी प्रत्येक चरण को धैर्यपूर्वक एवं विधिवत संपन्न कराते हैं, जिससे अनुष्ठान की प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है। पूजा का समय शुभ मुहूर्त के अनुसार पूर्व-निर्धारित किया जाता है। Online Mangal Dosh Puja में भी यही समय-सीमा लागू होती है। विस्तृत जानकारी के लिए पंडित जी से सीधे परामर्श लें।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, Online Mangal Dosh Puja पूर्णतः प्रभावशाली होती है। वैदिक शास्त्रों में संकल्प एवं श्रद्धा को सर्वाधिक महत्व दिया गया है — न कि केवल शारीरिक उपस्थिति को। Online Puja में साधक का संकल्प लिया जाता है, उनके नाम, गोत्र एवं जन्म-विवरण सहित विधिपूर्वक पूजा संपन्न की जाती है। Live Streaming के माध्यम से साधक पूरे अनुष्ठान का साक्षी बनते हैं। Vedic Rituals की शक्ति मंत्रों में होती है, जो स्थान-निरपेक्ष हैं। पंडित जी Indore एवं देश-विदेश के श्रद्धालुओं को Online Puja की सेवा प्रदान कर रहे हैं और अनेक परिवारों ने Online Mangal Dosh Puja से उत्कृष्ट अनुभव प्राप्त किया है।
मंगल दोष निवारण पूजा के लिए सर्वाधिक शुभ दिन मंगलवार माना जाता है, क्योंकि इस दिन मंगल ग्रह का विशेष प्रभाव होता है। इसके अतिरिक्त, विवाह की चर्चा प्रारंभ होने से पूर्व अथवा कुंडली मिलान के दौरान मंगल दोष की पुष्टि होने पर यह पूजा करवाना विशेष रूप से अनुशंसित है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, जब वैवाहिक जीवन में निरंतर कलह हो या भूमि-संबंधी अड़चनें आएँ, तब भी मुहूर्त देखकर यह पूजा करवाई जा सकती है। वे ज्योतिष के आधार पर प्रत्येक साधक के लिए उचित मुहूर्त निर्धारित करते हैं। Mangal Dosh Puja in Indore वर्षभर की जा सकती है, परंतु मंगलवार एवं विशेष ज्योतिषीय मुहूर्त का काल अधिक प्रभावशाली माना जाता है।
मंगल दोष निवारण पूजा में अनेक प्रकार की वैदिक सामग्री का उपयोग होता है। इनमें प्रमुख हैं — शिवलिंग रूपी मंगलदेव, मंगल यंत्र, लाल वस्त्र, लाल फूल, पंचामृत, चावल (भात पूजन हेतु), घी, तिल, जौ, हवन सामग्री, कुमकुम, अबीर-गुलाल एवं नैवेद्य आदि। पंडित श्रीकांत तिवारी जी स्वयं सामग्री की व्यवस्था करते हैं एवं साधक को अलग से कुछ विशेष वस्तुएँ लाने का निर्देश देते हैं। Online Mangal Dosh Puja में सामग्री की व्यवस्था पंडित जी द्वारा की जाती है। पूजा की सामग्री की पूर्ण सूची परामर्श के दौरान प्रदान की जाती है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, मंगल दोष निवारण पूजा विशेष रूप से उन जातकों के लिए अनुशंसित है जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष की पुष्टि हुई हो — विशेषकर विवाह से पूर्व। इसके अतिरिक्त, जिनके वैवाहिक जीवन में निरंतर मतभेद हो, विवाह में बार-बार विलंब हो रहा हो, स्वभाव में अत्यधिक क्रोध हो, भूमि-संबंधी अड़चनें हों या ऋण से मुक्ति न मिल रही हो — वे भी इस पूजा से विशेष लाभ उठा सकते हैं। यह पूजा सभी वर्गों के लिए उपयुक्त है। किसी भी संशय की स्थिति में पंडित जी से कुंडली परामर्श लेना उत्तम है।
हाँ, मंगल दोष निवारण पूजा का सीधा लाभ कुंडली मिलान में मिलता है। शास्त्रों में यह माना गया है कि जब मांगलिक दोष का विधिपूर्वक निवारण कर लिया जाता है, तो विवाह संबंधी प्रस्तावों में आ रही रुकावटें कम हो जाती हैं। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, पूजा के पश्चात साधक की कुंडली का पुनः ज्योतिषीय विश्लेषण कर उपयुक्त सलाह दी जाती है। इससे विवाह की संभावनाएँ बढ़ती हैं एवं दांपत्य जीवन में सामंजस्य की नींव मजबूत होती है। Mangal Dosh Puja in Indore करवाने वाले अनेक परिवारों ने इसकी पुष्टि की है।
मांगलिक भात पूजन एक विशिष्ट पूजन-विधि है जिसमें शिवलिंग रूपी मंगलदेव, भगवान गणेश एवं माता पार्वती की पूजा कर पंचामृत अभिषेक एवं चावल (भात) अर्पित किया जाता है — यह मंगल दोष शांति का एक प्रत्यक्ष विधान है। मंगल स्तोत्र इससे भिन्न है — यह एक स्तुति-पाठ है जिसके माध्यम से मंगल ग्रह की प्रसन्नता एवं ऋण-मुक्ति हेतु प्रार्थना की जाती है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी स्पष्ट करते हैं कि संपूर्ण मंगल दोष निवारण पूजा में दोनों विधान — भात पूजन एवं स्तोत्र-पाठ — सम्मिलित रूप से संपन्न किए जाते हैं, जिससे अनुष्ठान का प्रभाव अधिकतम होता है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी से मंगल दोष निवारण पूजा बुक करना अत्यंत सरल है। आप +91 79995 48900 पर सीधे फोन या WhatsApp संपर्क कर सकते हैं। वे आपकी कुंडली, समस्या एवं उपयुक्त मुहूर्त के आधार पर पूजा की योजना बनाते हैं। Online Mangal Dosh Puja के लिए Video Call पर परामर्श उपलब्ध है। पूजा का संकल्प आपके नाम एवं गोत्र के साथ लिया जाता है। Offline Puja के लिए Indore एवं आसपास के क्षेत्रों में सुविधा उपलब्ध है। पूजा की सामग्री, प्रक्रिया एवं कुंडली परामर्श से संबंधित सभी जानकारी परामर्श के दौरान विस्तार से प्रदान की जाती है। सेवा बुक करने के लिए आज ही संपर्क करें।
यदि आप मंगल दोष निवारण पूजा, कुंडली विश्लेषण, मांगलिक भात पूजन, Online Puja या व्यक्तिगत ज्योतिषीय मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते हैं तो पंडित श्रीकांत तिवारी जी से संपर्क करें।