पंडित श्रीकांत तिवारी जी द्वारा संपन्न
शास्त्रोक्त विधि से भगवान शिव का अभिषेक एवं रुद्र मंत्र अनुष्ठान
16+ वर्षों का अनुभव · M.A. संस्कृत · काशी की वैदिक परंपरा · Online & Offline Services
रुद्राभिषेक पूजा भगवान शिव को प्रसन्न करने, जीवन की समस्त बाधाओं को दूर करने एवं मानसिक-शारीरिक कल्याण के लिए किया जाने वाला अत्यंत फलदायी वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।
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रुद्राभिषेक वैदिक परंपरा का एक अत्यंत पवित्र एवं शक्तिशाली अनुष्ठान है। "रुद्र" भगवान शिव का एक प्रमुख नाम है एवं "अभिषेक" का अर्थ है — जल, दूध, घी, शहद आदि पवित्र द्रव्यों से स्नान कराना। इस प्रकार रुद्राभिषेक का तात्पर्य है — रुद्र मंत्रों के साथ शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक करना।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, रुद्राभिषेक शास्त्रों में वर्णित सर्वश्रेष्ठ शिव-उपासना विधियों में से एक है। यह अनुष्ठान यजुर्वेद के श्री रुद्रम् एवं अनुवाकों पर आधारित है, जो भगवान शिव की स्तुति के सर्वाधिक प्रामाणिक वैदिक मंत्र माने जाते हैं। इसमें नमकम् (श्री रुद्रम्) एवं चमकम् का पाठ किया जाता है।
रुद्राभिषेक अनेक प्रकार से संपन्न होता है — लघु रुद्राभिषेक, महारुद्राभिषेक एवं एकादश रुद्राभिषेक। पंडित श्रीकांत तिवारी जी साधक की कामना, कुंडली एवं परिस्थिति के अनुसार उचित प्रकार का रुद्राभिषेक निर्धारित करते हैं। प्रत्येक प्रकार की अपनी विशिष्ट फलदायिता होती है।
यह अनुष्ठान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक एवं आत्मिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। रुद्र मंत्रों की ध्वनि-तरंगें वातावरण को शुद्ध करती हैं, मन को शांति प्रदान करती हैं एवं नकारात्मक ऊर्जाओं का निवारण करती हैं।
Online Rudrabhishek Puja की सुविधा के माध्यम से पंडित श्रीकांत तिवारी जी देश-विदेश के श्रद्धालुओं को यह अनुष्ठान उनके घर बैठे ही संपन्न करवाने की सेवा प्रदान करते हैं। Live Streaming, Sankalp एवं Prasad Delivery के माध्यम से यह अनुष्ठान पूर्णतः प्रामाणिक रूप से किया जाता है।
यह अनुष्ठान यजुर्वेद की सर्वाधिक प्रतिष्ठित अभिषेक परंपरा पर आधारित है। प्रत्येक तत्व का शास्त्रीय महत्व है।
वैदिक परंपरा, शिव-उपासना एवं जीवन-कल्याण में रुद्राभिषेक का स्थान अत्यंत उच्च है।
श्री रुद्रम् यजुर्वेद के सर्वाधिक शक्तिशाली मंत्र-संग्रहों में से एक है। रुद्राभिषेक इन्हीं मंत्रों के साथ संपन्न होता है, इसीलिए यह वैदिक परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है।
दूध, दही, घी, शहद एवं शक्कर से निर्मित पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करना जीवन में पंचतत्वों की शुद्धि एवं समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रत्येक द्रव्य का अलग आध्यात्मिक प्रभाव है।
पुराणों में कहा गया है कि रुद्राभिषेक से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार यह पूजा साधक के जीवन में शिव-कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव कराती है।
महामृत्युंजय मंत्र के साथ रुद्राभिषेक गंभीर रोगों, दुर्घटनाओं से सुरक्षा एवं दीर्घायु प्रदान करने के लिए शास्त्रों में विशेष रूप से अनुशंसित किया गया है।
नए घर, कार्यालय अथवा व्यवसाय के शुभारंभ पर रुद्राभिषेक करने से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जाएँ नष्ट होती हैं एवं शिव-कृपा का कवच स्थापित होता है।
रुद्र मंत्रों की ध्वनि-तरंगें मन की चंचलता को शांत करती हैं। नियमित रुद्राभिषेक साधक को आंतरिक शांति, एकाग्रता एवं ध्यान में गहराई प्रदान करता है।
जीवन के विभिन्न अवसरों पर यह अनुष्ठान विशेष रूप से फलदायी होता है।
श्रावण मास भगवान शिव का प्रिय माह माना जाता है। इस दौरान किया गया रुद्राभिषेक सामान्य समय की तुलना में अत्यधिक फलदायी माना जाता है।
सोमवार एवं प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की विशेष उपासना का दिन माना जाता है। इन दिनों रुद्राभिषेक विशेष शुभ फल प्रदान करता है।
नए घर में प्रवेश, कार्यालय के शुभारंभ या व्यवसाय की नींव रखते समय रुद्राभिषेक वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा की स्थापना करता है।
गंभीर रोग, बार-बार होने वाली बीमारियाँ अथवा स्वास्थ्य में दीर्घकालिक अवरोध की स्थिति में महामृत्युंजय सहित रुद्राभिषेक विशेष रूप से अनुशंसित है।
नौकरी में रुकावट, व्यापार में हानि अथवा आर्थिक अस्थिरता की स्थिति में रुद्राभिषेक शिव की कृपा से बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है।
विवाह में विलंब, संतान सुख में बाधा अथवा दांपत्य जीवन में अशांति के समय रुद्राभिषेक भगवान शिव व माता पार्वती की कृपा प्राप्ति का माध्यम माना जाता है।
अत्यधिक चिंता, भय, अवसाद एवं मानसिक उद्विग्नता की स्थिति में रुद्र मंत्रों का पाठ एवं अभिषेक मन को गहरी शांति प्रदान करता है।
महाशिवरात्रि, शिवरात्रि, सोमवती अमावस्या एवं त्रयोदशी पर रुद्राभिषेक करवाना असाधारण आध्यात्मिक फल का अवसर माना जाता है।
किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति — परीक्षा, प्रतियोगिता, विदेश यात्रा, भूमि-संपत्ति — के लिए भी रुद्राभिषेक की संकल्प-पूजा अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, इन परिस्थितियों में रुद्राभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है।
जब कोई रोग लंबे समय से ठीक न हो, बार-बार बीमारी आती हो या शारीरिक कमज़ोरी बनी रहे — ऐसी स्थिति में महामृत्युंजय सहित रुद्राभिषेक विशेष रूप से अनुशंसित है।
व्यवसाय में हानि, नौकरी में रुकावट या उन्नति न होना भी शिव-कृपा की कमी का संकेत हो सकता है। रुद्राभिषेक इन अवरोधों को दूर करने में सहायक माना जाता है।
परिवार में निरंतर कलह, मनमुटाव, संबंधों में कड़वाहट अथवा घर का वातावरण अशांत रहना — इन स्थितियों में रुद्राभिषेक गृह-शांति का सर्वोत्तम उपाय माना जाता है।
अत्यधिक चिंता, भय, नकारात्मक सोच एवं मानसिक अशांति — रुद्र मंत्रों की ध्वनि इन सभी को शांत करने में अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
विवाह की बातचीत न बनना या संतान सुख में रुकावट आना — इन समस्याओं में भगवान शिव एवं माता पार्वती की कृपा के लिए रुद्राभिषेक एक प्रमाणित वैदिक उपाय है।
ऋण से मुक्ति न मिलना, धन का ठहराव न होना अथवा निरंतर आर्थिक उलझनें बने रहना — रुद्राभिषेक शिव की कृपा से आर्थिक स्थिरता प्राप्त करने में सहायक माना जाता है।
घर या व्यक्ति पर नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव, बुरे स्वप्न, भय अथवा अकारण अशांति की स्थिति में रुद्राभिषेक वातावरण को शुद्ध कर सुरक्षा कवच निर्मित करता है।
परीक्षा, प्रतियोगिता, न्यायालय के मामले, विदेश-यात्रा अथवा किसी भी महत्वपूर्ण लक्ष्य में बार-बार असफलता मिलने पर रुद्राभिषेक शिव की कृपा का द्वार खोलता है।
यह अनुष्ठान जीवन के हर पक्ष को शिव-कृपा से आलोकित करता है।
महामृत्युंजय सहित रुद्राभिषेक गंभीर रोगों से सुरक्षा, शीघ्र स्वास्थ्यलाभ एवं दीर्घायु प्रदान करने में सहायक माना जाता है।
रुद्र मंत्रों की ध्वनि मन की गहराई तक पहुँचकर चिंता, भय एवं अशांति को दूर करती है एवं आंतरिक स्थिरता स्थापित करती है।
शिव की कृपा से आर्थिक अवरोध दूर होते हैं, व्यवसाय में उन्नति होती है एवं धन-संपदा में वृद्धि के नए मार्ग प्रशस्त होते हैं।
परिवार में कलह समाप्त होता है, संबंधों में मधुरता आती है एवं घर का वातावरण सात्विक एवं शांतिमय बनता है।
रुद्राभिषेक एक शक्तिशाली सुरक्षा-कवच निर्मित करता है जो साधक एवं उसके परिवार को नकारात्मक ऊर्जाओं एवं बाधाओं से बचाता है।
विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं तथा संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों को शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
नौकरी एवं करियर में बाधाएँ दूर होती हैं, व्यवसाय में प्रगति होती है तथा कार्यक्षेत्र में स्थिरता का मार्ग प्रशस्त होता है।
नियमित रुद्राभिषेक साधक की आध्यात्मिक चेतना को जागृत करता है, ध्यान में गहराई लाता है एवं मोक्ष-मार्ग पर अग्रसर करता है।
ये सामान्य आध्यात्मिक अभ्यास हैं जो शिव-भक्ति को और अधिक फलदायी बनाते हैं।
प्रत्येक सोमवार व्रत रखें एवं घर पर शिवलिंग का जल अभिषेक करें। बिल्वपत्र, धतूरा एवं श्वेत पुष्प अर्पित करें। इससे भगवान शिव की नित्य कृपा बनी रहती है।
प्रतिदिन प्रातःकाल "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्..." महामृत्युंजय मंत्र का यथाशक्ति जाप करें। यह दीर्घायु, रोगनाशक एवं भय-निवारण के लिए अत्यंत फलदायी है।
प्रतिदिन अथवा प्रति सोमवार शिव चालीसा का पाठ एवं आरती करें। इससे शिव-कृपा का नित्य प्रवाह जीवन में बना रहता है एवं नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
भगवान शिव को बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय है। प्रतिदिन सुबह तीन बिल्वपत्र एवं एक लोटा जल शिवलिंग पर अर्पित करें। यह सरलतम एवं अत्यंत प्रभावी उपाय माना गया है।
प्रत्येक माह की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत रखें एवं संध्याकाल में शिव-पूजन करें। प्रदोष काल में की गई पूजा का फल अन्य समयों की तुलना में अनेक गुना अधिक माना जाता है।
शिव की उपासना करने वाले साधकों के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी से उचित रुद्राक्ष एवं धारण-विधि का मार्गदर्शन प्राप्त करें।
प्रतिदिन शांत मन से "ॐ नमः शिवाय" का मानसिक जाप करते हुए 10-15 मिनट ध्यान करें। इससे मन में गहरी शांति एवं स्थिरता स्थापित होती है।
नियमित रूप से शिव मंदिर जाएँ एवं मंदिर की परिक्रमा करें। यदि संभव हो तो श्रावण माह में प्रत्येक सोमवार शिव मंदिर में जलाभिषेक अवश्य करें।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी को रुद्राभिषेक, महारुद्राभिषेक एवं विभिन्न शिव-उपासना अनुष्ठानों में 16 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव प्राप्त है। उनके मार्गदर्शन में हजारों परिवारों ने शिव-कृपा का अनुभव किया है।
M.A. संस्कृत की उच्च शिक्षा के साथ उन्होंने वैदिक मंत्रशास्त्र, रुद्र पाठ, अभिषेक-विधि एवं यजुर्वेद की गहन शिक्षा प्राप्त की है। प्रामाणिक मंत्रोच्चार एवं शास्त्रीय विधि उनकी पूजा की विशेषता है।
काशी (वाराणसी) — भगवान शिव की नगरी — भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठित वैदिक विद्या का केंद्र है। पंडित जी ने काशी की इस महान शैव परंपरा से दीक्षा लेकर रुद्राभिषेक की समग्र विद्या अर्जित की है।
Online Rudrabhishek Puja की सुविधा से देश-विदेश के श्रद्धालु भी इस अनुष्ठान का लाभ उठा सकते हैं। Live Streaming एवं Video Call के माध्यम से संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी रूप से संपन्न होती है।
प्रत्येक साधक की कामना एवं परिस्थिति भिन्न होती है। पंडित जी पूजा के पूर्व एवं पश्चात व्यक्तिगत परामर्श प्रदान करते हैं — उचित प्रकार का रुद्राभिषेक, मुहूर्त एवं नियमित उपाय सहित।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी प्रत्येक चरण को शास्त्रोक्त विधि से संपन्न कराते हैं।
पूजा के प्रारंभ से पूर्व पंडित श्रीकांत तिवारी जी साधक की कामना, परिस्थिति एवं उचित प्रकार के रुद्राभिषेक का निर्धारण करते हैं — लघु, महारुद्राभिषेक अथवा एकादश रुद्राभिषेक। शुभ मुहूर्त भी इसी समय निर्धारित किया जाता है।
पूजन-स्थान की भूमि-शुद्धि, शिवलिंग की स्थापना एवं सभी अभिषेक सामग्री — पंचामृत, गंगाजल, सुगंधित द्रव्य, बिल्वपत्र, धतूरा, भस्म, पुष्प आदि — का विधिपूर्वक संयोजन किया जाता है।
साधक के नाम, गोत्र एवं मनोकामना सहित भगवान शिव के समक्ष विधिपूर्वक संकल्प लिया जाता है। यह संकल्प अनुष्ठान का प्राण है। Online पूजा में भी यह संकल्प पूर्ण विधि से लिया जाता है।
रुद्राभिषेक के प्रारंभ में भगवान गणेश का पूजन एवं वरुण कलश की स्थापना की जाती है। इसके पश्चात नवग्रह पूजन एवं मातृका पूजन संपन्न होता है, जो अनुष्ठान की नींव माने जाते हैं।
दूध, दही, घी, शहद एवं शक्कर से निर्मित पंचामृत से शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक किया जाता है। प्रत्येक द्रव्य के साथ विशेष मंत्र-पाठ होता है। इसके पश्चात गंगाजल एवं सुगंधित जल से अभिषेक संपन्न होता है।
यजुर्वेद के श्री रुद्रम् एवं चमकम् का शास्त्रोक्त उच्चारण के साथ पाठ किया जाता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी काशी-परंपरा के अनुसार प्रत्येक अनुवाक का पूर्ण शुद्ध पाठ करते हैं। महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी इसी चरण में संपन्न होता है।
भगवान शिव का षोडशोपचार (सोलह उपचार) से विधिपूर्वक पूजन किया जाता है। बिल्वपत्र, धतूरा, भस्म, श्वेत पुष्प एवं नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। प्रत्येक उपचार के साथ उसके शास्त्रीय मंत्र का उच्चारण होता है।
रुद्र मंत्रों के साथ हवन-कुंड में अग्नि प्रज्वलित कर आहुतियाँ दी जाती हैं। घी, तिल, जौ, बिल्वपत्र एवं विशेष रुद्राभिषेक सामग्री से हवन संपन्न होता है। अंत में पूर्णाहुति दी जाती है।
हवन के पश्चात भगवान शिव की महाआरती संपन्न होती है एवं अभिषेक के जल सहित पंचामृत प्रसाद वितरित किया जाता है। Online पूजा में Prasad Delivery की व्यवस्था भी उपलब्ध है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी पूजा के पश्चात साधक को व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान करते हैं — नियमित व्रत-उपाय, रुद्राक्ष धारण, सोमवार पूजन की विधि एवं शिव-कृपा को जीवन में स्थायी बनाने के सुझाव।
रुद्राभिषेक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान शिव से साक्षात् संवाद का माध्यम है। जब श्री रुद्रम् के मंत्र-स्वर, पंचामृत की सुगंध एवं हवन की अग्नि एक साथ उठती है, तो वह ऊर्जा साधक के जीवन को नई दिशा देती है। शिव की कृपा अनंत है — केवल सच्ची श्रद्धा एवं शास्त्रोक्त विधि चाहिए।
रुद्राभिषेक भगवान शिव (रुद्र) का यजुर्वेद के श्री रुद्रम् मंत्रों के साथ पंचामृत एवं जल से अभिषेक करने का वैदिक अनुष्ठान है। इसे शास्त्रों में शिव को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम तरीका माना गया है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह पूजा रोग-निवारण, मानसिक शांति, गृह-शांति, व्यवसाय में उन्नति एवं जीवन की सर्वांगीण समृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली है। इसमें नमकम् (श्री रुद्रम्) एवं चमकम् का पाठ किया जाता है जो यजुर्वेद के सर्वाधिक शक्तिशाली मंत्र-संग्रह हैं।
लघु रुद्राभिषेक में श्री रुद्रम् का एक बार पाठ होता है, जो सामान्य मनोकामनाओं, मानसिक शांति एवं नित्य शिव-उपासना के लिए उपयुक्त है। महारुद्राभिषेक में श्री रुद्रम् का ग्यारह बार पाठ होता है, जो गंभीर समस्याओं, रोग-निवारण एवं विशेष कामनाओं के लिए अनुशंसित है। एकादश रुद्राभिषेक ग्यारह पंडितों द्वारा एक साथ किया जाने वाला विशेष आयोजन है जो अत्यंत शक्तिशाली एवं फलदायी माना जाता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी साधक की परिस्थिति के अनुसार उचित प्रकार का अभिषेक सुझाते हैं।
लघु रुद्राभिषेक सामान्यतः दो से तीन घंटे में संपन्न होता है। महारुद्राभिषेक में पाँच से सात घंटे लग सकते हैं, जबकि एकादश रुद्राभिषेक एक पूर्ण दिन का आयोजन होता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी प्रत्येक चरण — संकल्प, पंचामृत अभिषेक, श्री रुद्रम् पाठ, षोडशोपचार पूजन एवं हवन — को धैर्यपूर्वक एवं शास्त्रोक्त क्रम में संपन्न कराते हैं। Online Rudrabhishek Puja में भी यही समय-सीमा लागू होती है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, Online Rudrabhishek Puja पूर्णतः प्रभावशाली होती है। वैदिक शास्त्रों में संकल्प एवं श्रद्धा को सर्वाधिक महत्व दिया गया है — न कि केवल शारीरिक उपस्थिति को। Online Puja में साधक का संकल्प उनके नाम, गोत्र एवं मनोकामना सहित लिया जाता है, श्री रुद्रम् का पूर्ण पाठ एवं हवन विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है। Live Streaming के माध्यम से साधक संपूर्ण अनुष्ठान के साक्षी बनते हैं। Prasad Delivery की सुविधा भी उपलब्ध है।
रुद्राभिषेक के लिए सोमवार सर्वाधिक शुभ दिन माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव का प्रिय दिन है। इसके अतिरिक्त प्रदोष व्रत (त्रयोदशी), महाशिवरात्रि, सोमवती अमावस्या एवं श्रावण माह के सभी सोमवार विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं। पंडित श्रीकांत तिवारी जी साधक की कामना एवं परिस्थिति के अनुसार शुभ मुहूर्त निर्धारित करते हैं। वर्षभर रुद्राभिषेक किया जा सकता है।
रुद्राभिषेक में मुख्य सामग्री है — शिवलिंग, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), गंगाजल, बिल्वपत्र, धतूरा, भस्म, श्वेत पुष्प, चंदन, रुद्राक्ष माला, हवन सामग्री, घी, तिल, जौ एवं नैवेद्य। पंडित श्रीकांत तिवारी जी स्वयं सामग्री की व्यवस्था करते हैं। Online Rudrabhishek Puja में सामग्री पंडित जी द्वारा व्यवस्थित की जाती है। परामर्श के दौरान संपूर्ण सूची प्रदान की जाती है।
रुद्राभिषेक पूजा सभी के लिए अनुशंसित है — विशेष रूप से उन साधकों के लिए जो रोग-निवारण, मानसिक शांति, गृह-शांति, करियर में बाधाओं के निवारण अथवा विवाह-संतान संबंधी समस्याओं का समाधान चाहते हों। इसके अतिरिक्त, जो लोग नए घर या व्यवसाय का शुभारंभ करना चाहते हों, नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा चाहते हों, या जो शिव-भक्ति में नियमित अनुष्ठान करना चाहते हों — सभी के लिए यह पूजा अत्यंत लाभदायक है।
महामृत्युंजय मंत्र — "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे..." — भगवान शिव के रुद्र-स्वरूप को समर्पित सर्वाधिक शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। इसे मृत्यु-निवारण, रोग-मुक्ति एवं दीर्घायु के लिए शास्त्रों में विशेष रूप से वर्णित किया गया है। जब रुद्राभिषेक के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप होता है, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी इस मंत्र का शुद्ध वैदिक उच्चारण के साथ निर्धारित संख्या में जाप करते हैं।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी से रुद्राभिषेक पूजा बुक करना अत्यंत सरल है। आप +91 79995 48900 पर सीधे फोन या WhatsApp संपर्क कर सकते हैं। वे आपकी कामना, परिस्थिति एवं उचित मुहूर्त के आधार पर पूजा की योजना बनाते हैं — लघु अभिषेक, महारुद्राभिषेक या एकादश रुद्राभिषेक। Online Rudrabhishek Puja के लिए Video Call पर परामर्श उपलब्ध है। Indore एवं आसपास के क्षेत्रों में Offline पूजा की भी सुविधा है। आज ही संपर्क करें।
यदि आप रुद्राभिषेक पूजा, महारुद्राभिषेक, Online Rudrabhishek Puja अथवा व्यक्तिगत आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते हैं तो पंडित श्रीकांत तिवारी जी से संपर्क करें।