पंडित श्रीकांत तिवारी जी द्वारा संपन्न
शास्त्रोक्त विधि से नवचंडी पूजा एवं चंडी अनुष्ठान
16+ वर्षों का अनुभव · M.A. संस्कृत · काशी की वैदिक परंपरा · Online & Offline Services
नवचंडी पूजा माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, आध्यात्मिक उन्नति एवं जीवन में शुभता स्थापित करने हेतु किया जाने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।
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नवचंडी पूजा सनातन धर्म के सर्वाधिक प्रतिष्ठित एवं प्रभावशाली अनुष्ठानों में से एक है। यह पूजा माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना पर आधारित है, जिन्हें सामूहिक रूप से नवचंडी कहा जाता है। वैदिक परंपरा में यह माना जाता है कि जब साधक उचित श्रद्धा, विधि एवं मंत्रोच्चार के साथ यह अनुष्ठान संपन्न करता है, तो देवी भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
इस पूजा का मूल आधार दुर्गा सप्तशती है, जिसे चंडी पाठ भी कहते हैं। दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंश है, जिसमें सात सौ श्लोकों के माध्यम से माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों, उनकी महिमा, उनके द्वारा किए गए असुर संहार एवं उनकी उपासना के विधान का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, नवचंडी पूजा में दुर्गा सप्तशती का नौ बार पाठ किया जाता है। इसीलिए इसे "नव" (नौ) और "चंडी" (देवी चंडिका) के संयोग से "नवचंडी पूजा" कहा जाता है। यह अनुष्ठान केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक गहन देवी साधना है जो साधक को आध्यात्मिक शक्ति एवं मानसिक स्थिरता प्रदान करती है।
वेदों एवं पुराणों में इस अनुष्ठान का अत्यंत विस्तृत वर्णन मिलता है। देवीभागवत, स्कंदपुराण एवं मार्कंडेय पुराण में चंडी पाठ की महिमा को असाधारण बताया गया है। प्राचीन काल से ऋषि-मुनि एवं राजाओं द्वारा इस पूजा को विशेष अवसरों पर करवाया जाता था — युद्ध के पहले, राज्याभिषेक के समय, प्राकृतिक विपदाओं में तथा आध्यात्मिक उन्नति हेतु।
Navchandi Puja एक समग्र वैदिक कार्यक्रम है जिसमें संकल्प, पूजन, चंडी पाठ, हवन एवं पूर्णाहुति सम्मिलित होती है। प्रत्येक चरण का अपना महत्व है और इसे शास्त्रोक्त विधि से संपन्न करना अनिवार्य है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी इस संपूर्ण प्रक्रिया को वैदिक परंपरा एवं काशी की विद्वत्ता के अनुसार संपन्न कराते हैं।
Online Navchandi Puja की सुविधा के माध्यम से पंडित श्रीकांत तिवारी जी देश-विदेश के श्रद्धालुओं को यह अनुष्ठान उनके घर बैठे ही संपन्न करवाने की सेवा प्रदान करते हैं। Live Streaming, Sankalp एवं Prasad Delivery के माध्यम से यह अनुष्ठान पूर्णतः प्रामाणिक रूप से किया जाता है।
यह अनुष्ठान सनातन धर्म की गहनतम देवी उपासना परंपरा पर आधारित है। प्रत्येक तत्व का शास्त्रीय महत्व है।
सनातन धर्म, देवी उपासना एवं वैदिक परंपरा में नवचंडी पूजा का स्थान अत्यंत उच्च है।
सनातन धर्म में शक्ति उपासना का केंद्र माँ दुर्गा को माना गया है। नवचंडी पूजा इसी परंपरा की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। यह अनुष्ठान सात सौ वर्षों से भी अधिक प्राचीन शास्त्रीय परंपरा पर आधारित है और आज भी उतनी ही प्रभावकारी मानी जाती है।
देवी भागवत में कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा एवं विधिपूर्वक चंडी पाठ करवाता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। Devi Sadhana की यह परंपरा साधक को आंतरिक शक्ति, आत्मविश्वास एवं मानसिक संतुलन प्रदान करती है।
Vedic Rituals के माध्यम से मंत्रों की ध्वनि एवं हवन की अग्नि वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। नवचंडी पूजा में प्रयुक्त मंत्र अत्यंत शक्तिशाली हैं और वे स्थान विशेष को दैवीय चेतना से ओतप्रोत करते हैं।
नवचंडी पूजा नकारात्मक शक्तियों, बुरी दृष्टि, तांत्रिक बाधाओं एवं ऊर्जा असंतुलन को दूर करने में अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। माँ चंडिका की कृपा से साधक के जीवन में सुरक्षा कवच स्थापित होता है।
परिवार में शांति, प्रेम एवं सहयोग की स्थापना हेतु नवचंडी पूजा अत्यंत लाभदायक मानी जाती है। यह पूजा गृह के वातावरण को शुद्ध करती है एवं पारिवारिक संबंधों में मधुरता लाती है।
यह अनुष्ठान केवल सांसारिक समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि साधक को आत्मज्ञान की ओर भी अग्रसर करता है। नियमित Spiritual Guidance एवं Devi Sadhana से व्यक्ति में आंतरिक जागरण की प्रक्रिया आरंभ होती है।
जीवन के विभिन्न अवस्थाओं में यह अनुष्ठान विशेष रूप से फलदायी होता है।
जब जीवन के हर क्षेत्र में रुकावट आए, कार्य पूर्ण न हो सके एवं निरंतर असफलता मिले, तब नवचंडी पूजा ऊर्जा परिवर्तन का श्रेष्ठ माध्यम है।
तांत्रिक बाधा, बुरी नज़र, वास्तु दोष या पारिवारिक कलह की स्थिति में यह पूजा नकारात्मकता के आवरण को हटाती है।
व्यवसाय में निरंतर हानि, ग्राहक न आना, साझेदारी में समस्या — इन परिस्थितियों में Navchandi Puja व्यापारिक बाधाओं को दूर करने में सहायक मानी जाती है।
अत्यधिक तनाव, चिंता, भय एवं मानसिक असंतुलन की स्थिति में यह अनुष्ठान मानसिक शांति एवं स्थिरता प्रदान करने में सहायक है।
परिवार में अनावश्यक झगड़े, अशांति, मतभेद एवं बिखराव की स्थिति में नवचंडी पूजा पारिवारिक एकता एवं सौहार्द की स्थापना करती है।
जो साधक अपनी आध्यात्मिक यात्रा को गहरा करना चाहते हैं, देवी उपासना में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह अनुष्ठान विशेष आत्मिक उत्थान का माध्यम बनता है।
नई परियोजना, व्यवसाय, विवाह, गृह प्रवेश या किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में देवी माँ का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु यह पूजा की जाती है।
शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि में नवचंडी पूजा का विशेष महत्व है। इस समय देवी शक्ति का आवाहन विशेष फलदायी माना जाता है।
जब साधक किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति हेतु संकल्प लेकर देवी माँ के चरणों में समर्पित होना चाहे, तब नवचंडी पूजा सर्वोत्तम माध्यम है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, ये समस्याएँ अक्सर आध्यात्मिक असंतुलन का संकेत देती हैं।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, जब परिवार में बिना कारण के लड़ाई-झगड़े बढ़ने लगें, आपसी समझ कम हो जाए, पति-पत्नी में मतभेद बढ़ें या संतान अनुशासनहीन हो जाए, तो यह स्थिति प्रायः नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव का संकेत होती है। नवचंडी पूजा परिवार में देवी का सात्विक आवरण स्थापित करती है।
निरंतर मानसिक भार, अनावश्यक भय, नींद न आना, बेचैनी — ये लक्षण केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक असंतुलन के भी संकेत हो सकते हैं। Vedic Rituals के माध्यम से मंत्र-ध्वनि मस्तिष्क को शांति प्रदान करती है और चित्त को स्थिर करती है।
जब बिना किसी स्पष्ट कारण के भय लगे, बुरे स्वप्न आएँ, स्थान विशेष पर असुविधा हो या नकारात्मक अनुभव हों, तब पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार नवचंडी पूजा एवं देवी कवच का पाठ सुरक्षात्मक वातावरण निर्मित करता है।
नकारात्मक विचारों की निरंतरता, आत्म-संदेह, जीवन से निराशा एवं उद्देश्यहीनता आध्यात्मिक रिक्तता के लक्षण हैं। Devi Sadhana के माध्यम से साधक में सकारात्मक चेतना जागृत होती है और जीवन के प्रति उत्साह लौटता है।
जब व्यक्ति को अपनी क्षमता पर विश्वास न हो, महत्वपूर्ण निर्णय लेने में कठिनाई हो, या सामाजिक जीवन में हीनभावना का अनुभव हो — तब नवचंडी पूजा आत्मशक्ति को जागृत कर व्यक्ति में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करती है।
पूजा-पाठ में मन न लगना, साधना में बाधा, भक्ति-भावना का क्षीण होना — ये आध्यात्मिक अवरोध के संकेत हैं। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार नवचंडी पूजा इन अवरोधों को दूर कर साधना-पथ को प्रशस्त करती है।
जब प्रयास, योग्यता एवं संसाधन होने के बावजूद कार्य में निरंतर असफलता मिले, तो यह ऊर्जा असंतुलन का संकेत हो सकता है। Navchandi Puja में Durga Saptashati के मंत्र इस ऊर्जा-अवरोध को तोड़कर मार्ग प्रशस्त करते हैं।
बाहरी सुख-सुविधाओं के होते हुए भी भीतरी अशांति बनी रहे, तृप्ति न हो, जीवन में आनंद की कमी हो — यह गहन आध्यात्मिक रिक्तता का लक्षण है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी द्वारा संपन्न Navchandi Puja ऐसी आंतरिक शांति स्थापित करती है जो स्थायी हो।
यह अनुष्ठान जीवन के हर पक्ष को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
माँ दुर्गा की विशेष कृपा एवं आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। साधक को आध्यात्मिक उन्नति एवं देवी चेतना का अनुभव होता है।
नकारात्मक शक्तियों, बुरी दृष्टि, तांत्रिक बाधाओं से दैवीय सुरक्षा कवच का निर्माण होता है।
मन में गहरी शांति, एकाग्रता एवं स्थिरता आती है। तनाव, चिंता एवं भय में उल्लेखनीय कमी अनुभव होती है।
परिवार में प्रेम, सहयोग एवं एकता बढ़ती है। गृह का वातावरण सात्विक एवं शांतिपूर्ण बनता है।
व्यवसाय में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं। नए अवसर प्राप्त होते हैं एवं आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
घर एवं कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। वातावरण पवित्र एवं ऊर्जावान बनता है।
जीवन में स्पष्टता आती है, निर्णय-शक्ति बढ़ती है एवं लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में सहायक वातावरण निर्मित होता है।
हृदय में देवी माँ के प्रति श्रद्धा, प्रेम एवं भक्ति-भाव गहरा होता है। साधना में आनंद की अनुभूति होती है।
शरीर में ऊर्जा एवं जीवन-शक्ति का संचार होता है। दीर्घकालिक स्वास्थ्य-लाभ के लिए यह अनुष्ठान सहायक माना जाता है।
भीतर से शक्ति एवं आत्मबल की अनुभूति होती है। आत्मविश्वास बढ़ता है एवं जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखने की क्षमता विकसित होती है।
सामाजिक एवं व्यक्तिगत संबंधों में मधुरता आती है। नए शुभ संबंध बनते हैं एवं पुराने बिगड़े संबंध सुधरते हैं।
Devi Sadhana के माध्यम से साधक के भीतर आत्मज्ञान की जिज्ञासा जागृत होती है और आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा मिलती है।
ये सामान्य आध्यात्मिक अभ्यास हैं जो जीवन में सकारात्मकता लाते हैं।
प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात "ॐ दुं दुर्गायै नमः" या "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" का 108 बार जाप करें। इससे दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है।
शुक्रवार को माँ दुर्गा के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें। सात्विक भाव से माँ का स्मरण करें एवं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
प्रतिदिन या प्रति शुक्रवार दुर्गा चालीसा का पाठ करें। इससे मन में शांति आती है और माँ की कृपा बनी रहती है।
शुक्रवार को लाल वस्त्र धारण करें। माँ दुर्गा को लाल फूल, लाल चुनरी अर्पित करें। लाल रंग शक्ति और सिद्धि का प्रतीक है।
नवरात्रि में अष्टमी या नवमी को नौ कन्याओं का पूजन करें एवं उन्हें भोजन कराएँ। इससे देवी माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में यथाशक्ति उपवास करें। फलाहार ग्रहण करें एवं माँ के नाम का स्मरण करते रहें।
प्रतिदिन किसी न किसी सत्कार्य में लगे रहें। दान, सेवा, क्षमा एवं करुणा — ये सात्विक कर्म देवी माँ को प्रिय हैं।
प्रतिदिन कम से कम 10-15 मिनट शांत मन से ध्यान करें। माँ दुर्गा के स्वरूप का ध्यान करते हुए गहरी साँस लें। इससे मानसिक शांति मिलती है।
महत्वपूर्ण सूचना: ये सामान्य आध्यात्मिक अभ्यास हैं जो सकारात्मक जीवनशैली के अंग हैं। ये व्यक्तिगत Spiritual Guidance एवं विशेषज्ञ द्वारा संपन्न किए जाने वाले Vedic Rituals का विकल्प नहीं हैं। व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान हेतु पंडित श्रीकांत तिवारी जी से परामर्श अवश्य लें।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी को नवचंडी पूजा, Durga Saptashati एवं Chandi Path में 16 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव प्राप्त है। उनके द्वारा संपन्न अनुष्ठानों से सैकड़ों परिवारों ने लाभ प्राप्त किया है।
M.A. संस्कृत की उच्च शिक्षा के साथ उन्होंने वैदिक व्याकरण, मंत्रशास्त्र, पूजा-विधान एवं ज्योतिष की गहन शिक्षा प्राप्त की है। शास्त्रों की प्रामाणिक समझ उनकी सेवाओं को विशेष विश्वसनीय बनाती है।
काशी (वाराणसी) भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठित वैदिक विद्या का केंद्र है। पंडित जी ने काशी की इस महान परंपरा से दीक्षा लेकर नवचंडी पूजा की समग्र विद्या अर्जित की है।
Online Navchandi Puja की सुविधा से देश-विदेश के श्रद्धालु भी इस अनुष्ठान का लाभ उठा सकते हैं। Live Streaming, Video Call के माध्यम से संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी रूप से संपन्न होती है।
प्रत्येक व्यक्ति की परिस्थिति भिन्न होती है। पंडित जी पूजा के पूर्व एवं पश्चात व्यक्तिगत परामर्श प्रदान करते हैं जिससे साधक को अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी प्रत्येक चरण को शास्त्रोक्त विधि से संपन्न कराते हैं।
पूजा के प्रारंभ से पूर्व पंडित श्रीकांत तिवारी जी साधक से व्यक्तिगत परामर्श करते हैं। समस्या, कामना एवं जन्म-कुंडली के आधार पर संकल्प का निर्धारण किया जाता है। यह प्रक्रिया पूजा को व्यक्तिगत एवं प्रभावशाली बनाती है।
साधक के नाम, गोत्र एवं कामना सहित देवी माँ के समक्ष विधिपूर्वक संकल्प लिया जाता है। यह संकल्प पूजा का आधार है और इसके बिना अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
पूजन के लिए पवित्र स्थान की शुद्धि, कलश स्थापना, देवी प्रतिमा का श्रृंगार एवं सभी आवश्यक सामग्री का विधिपूर्वक संयोजन किया जाता है। प्रत्येक सामग्री का शास्त्रीय महत्व है।
देवी माँ का षोडशोपचार (सोलह उपचार) से विधिपूर्वक पूजन किया जाता है। आह्वान, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि सभी उपचार शास्त्रोक्त क्रम से अर्पित किए जाते हैं।
नवचंडी पूजा का केंद्र Durga Saptashati का नौ बार पाठ है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी शास्त्रीय उच्चारण एवं विधिपूर्वक इस पाठ को संपन्न करते हैं। कवच, अर्गला, कीलक, रात्रि सूक्त सहित संपूर्ण Chandi Path किया जाता है।
पाठ की समाप्ति के पश्चात हवन-कुंड में अग्नि प्रज्वलित कर विशेष मंत्रों के साथ आहुतियाँ दी जाती हैं। घी, समिधा, नवग्रह एवं देवी की विशेष सामग्री से हवन संपन्न किया जाता है।
हवन के अंत में देवी माँ को समर्पित पूर्णाहुति दी जाती है जो अनुष्ठान की परिपूर्णता का प्रतीक है। इस क्षण को अत्यंत शुभ एवं शक्तिशाली माना जाता है।
माँ दुर्गा की महाआरती के साथ अनुष्ठान का समापन होता है। साधक के लिए विशेष आशीर्वाद का उच्चारण किया जाता है एवं प्रसाद वितरण किया जाता है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी पूजा के पश्चात साधक को व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान करते हैं — क्या करें, क्या न करें, किस प्रकार देवी माँ की कृपा को जीवन में स्थायी बनाएँ। यह Spiritual Guidance अनुष्ठान को दीर्घकालिक फलदायी बनाती है।
नवचंडी पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि माँ भगवती की कृपा प्राप्त करने, आध्यात्मिक उन्नति, सकारात्मक ऊर्जा एवं जीवन में संतुलन स्थापित करने का एक प्रभावशाली माध्यम है। उचित विधि, श्रद्धा एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न किया गया अनुष्ठान साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक माना जाता है।
नवचंडी पूजा सनातन धर्म का एक विशेष एवं अत्यंत शक्तिशाली अनुष्ठान है जिसमें दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) का नौ बार पाठ किया जाता है। यह पूजा माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की एक साथ उपासना का माध्यम है। सामान्य पूजा और नवचंडी पूजा में मूलभूत अंतर यह है कि सामान्य पूजा में एक बार चंडी पाठ किया जाता है, जबकि नवचंडी में यह नौ बार किया जाता है — इसीलिए इसकी शक्ति एवं प्रभाव कई गुना अधिक माना जाता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह अनुष्ठान केवल एक विधि नहीं, बल्कि एक गहन देवी साधना है जो साधक के जीवन में समग्र परिवर्तन लाती है। इसमें हवन, संकल्प, षोडशोपचार पूजन एवं पूर्णाहुति सभी सम्मिलित होती हैं।
नवचंडी पूजा के लाभ अत्यंत व्यापक हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से यह माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्रदान करती है, नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा देती है एवं साधक की आत्मिक उन्नति में सहायक होती है। मानसिक दृष्टि से यह तनाव, भय एवं चिंता से मुक्ति दिलाती है और मन में गहरी शांति स्थापित करती है। पारिवारिक जीवन में गृह कलह दूर होती है, परिवार में प्रेम एवं सहयोग बढ़ता है। व्यावसायिक क्षेत्र में बाधाएँ दूर होती हैं एवं नए अवसर प्राप्त होते हैं। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह पूजा जीवन के हर पक्ष में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। Navchandi Puja Indore में भी व्यापक रूप से की जाती है और यहाँ के श्रद्धालुओं ने इसके अनेक लाभ अनुभव किए हैं।
नवचंडी पूजा एक विस्तारित अनुष्ठान है जिसे संपन्न करने में सामान्यतः दो से तीन दिन का समय लगता है। दुर्गा सप्तशती का नौ बार पाठ, हवन, संकल्प एवं अन्य विधियों के साथ इसे शास्त्रोक्त रूप से पूर्ण करने में यह समय लगता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी प्रत्येक चरण को धैर्यपूर्वक एवं विधिवत संपन्न कराते हैं, जिससे अनुष्ठान की प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है। Chandi Path की गति, पाठकों की संख्या एवं स्थान विशेष के अनुसार समय में कुछ परिवर्तन भी हो सकता है। Online Navchandi Puja में भी यही समय-सीमा लागू होती है। विस्तृत जानकारी के लिए पंडित जी से सीधे परामर्श लें।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, Online Navchandi Puja पूर्णतः प्रभावशाली होती है। वैदिक शास्त्रों में संकल्प एवं श्रद्धा को सर्वाधिक महत्व दिया गया है — न कि केवल शारीरिक उपस्थिति को। Online Puja में साधक का संकल्प लिया जाता है, उनके नाम एवं गोत्र सहित विधिपूर्वक पूजा संपन्न की जाती है। Live Streaming के माध्यम से साधक पूरे अनुष्ठान का साक्षी बनते हैं। Vedic Rituals की शक्ति मंत्रों में होती है, जो स्थान-निरपेक्ष हैं। पंडित जी Indore एवं देश-विदेश के श्रद्धालुओं को Online Puja की सेवा प्रदान कर रहे हैं और अनेक परिवारों ने Online Navchandi Puja से उत्कृष्ट अनुभव प्राप्त किया है।
नवचंडी पूजा के लिए सर्वाधिक शुभ समय नवरात्रि (चैत्र एवं शारदीय) है, क्योंकि इस समय देवी शक्ति का विशेष आवाहन किया जाता है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी, नवमी एवं पूर्णिमा भी अत्यंत शुभ मानी जाती है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, जब जीवन में अत्यधिक बाधाएँ हों, कोई विशेष संकट हो या कोई शुभ कार्य प्रारंभ करना हो — तब मुहूर्त देखकर यह पूजा करवाई जा सकती है। वे ज्योतिष के आधार पर प्रत्येक साधक के लिए उचित मुहूर्त निर्धारित करते हैं। Navchandi Puja in Indore वर्षभर की जा सकती है, परंतु नवरात्रि का काल विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है।
नवचंडी पूजा में अनेक प्रकार की वैदिक सामग्री का उपयोग होता है। इनमें प्रमुख हैं — देवी माँ की प्रतिमा या चित्र, कलश, लाल एवं पीले वस्त्र, फूल (विशेषतः लाल), दुर्गा सप्तशती ग्रंथ, हवन सामग्री (घी, समिधा, नवग्रह सामग्री), पंचामृत, श्रृंगार सामग्री, नैवेद्य आदि। पंडित श्रीकांत तिवारी जी स्वयं सामग्री की व्यवस्था करते हैं एवं साधक को अलग से कुछ विशेष वस्तुएँ लाने का निर्देश देते हैं। Online Navchandi Puja में सामग्री की व्यवस्था पंडित जी द्वारा की जाती है। पूजा की सामग्री की पूर्ण सूची परामर्श के दौरान प्रदान की जाती है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, नवचंडी पूजा प्रत्येक श्रद्धालु के लिए लाभकारी है, परंतु विशेष रूप से उन लोगों के लिए अनुशंसित है जो जीवन में निरंतर बाधाओं से जूझ रहे हों, मानसिक अशांति अनुभव कर रहे हों, परिवार में कलह हो, व्यापार में हानि हो, या आध्यात्मिक उन्नति की कामना हो। यह पूजा सभी वर्गों — गृहस्थ, व्यापारी, विद्यार्थी — के लिए उपयुक्त है। जिन लोगों की कुंडली में ग्रह-दोष हो, जिन्हें बुरे स्वप्न आते हों, या जिनके जीवन में अचानक बड़ा परिवर्तन आया हो — वे भी इस Vedic Ritual से विशेष लाभ उठा सकते हैं। किसी भी संशय की स्थिति में पंडित जी से परामर्श लेना उत्तम है।
हाँ, नवचंडी पूजा का लाभ पूरे परिवार को मिलता है। शास्त्रों में इसे कुल-देवता की उपासना के समकक्ष माना गया है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, जब किसी परिवार के सदस्य के नाम पर संकल्प लेकर यह पूजा संपन्न होती है, तो उसके परिवार के सभी सदस्य इस दैवीय कृपा के अधिकारी बनते हैं। परिवार में प्रेम, शांति, सहयोग एवं समृद्धि आती है। बच्चों की शिक्षा में उन्नति, वृद्धजनों का स्वास्थ्य, दांपत्य जीवन में मधुरता — ये सभी Navchandi Puja के पारिवारिक लाभ हैं। Navchandi Puja in Indore करवाने वाले अनेक परिवारों ने इसकी पुष्टि की है।
दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) एक ग्रंथ है जिसमें सात सौ श्लोक हैं और यह मार्कंडेय पुराण का अंश है। इसमें माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर, चंड-मुंड एवं शुंभ-निशुंभ के वध की कथाएँ हैं। Chandi Path इसी ग्रंथ के पाठ की विधि को कहते हैं — अर्थात दुर्गा सप्तशती का शास्त्रोक्त क्रम में पठन। पंडित श्रीकांत तिवारी जी स्पष्ट करते हैं कि नवचंडी पूजा में Chandi Path ही केंद्रीय तत्व है। Durga Saptashati की महिमा वेदों के समकक्ष मानी जाती है एवं इसका प्रत्येक श्लोक एक मंत्र की तरह कार्य करता है। इसीलिए Vedic Rituals में इसका स्थान सर्वोच्च है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी से नवचंडी पूजा बुक करना अत्यंत सरल है। आप +91 79995 48900 पर सीधे फोन या WhatsApp संपर्क कर सकते हैं। वे आपकी समस्या, कामना एवं उपयुक्त मुहूर्त के आधार पर पूजा की योजना बनाते हैं। Online Navchandi Puja के लिए Video Call पर परामर्श उपलब्ध है। पूजा का संकल्प आपके नाम एवं गोत्र के साथ लिया जाता है। Offline Puja के लिए Indore एवं आसपास के क्षेत्रों में सुविधा उपलब्ध है। पूजा की सामग्री, प्रक्रिया एवं Spiritual Guidance से संबंधित सभी जानकारी परामर्श के दौरान विस्तार से प्रदान की जाती है। सेवा बुक करने के लिए आज ही संपर्क करें।
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