पंडित श्रीकांत तिवारी जी द्वारा संपन्न
शास्त्रोक्त विधि से पितृ दोष शांति, पिंडदान, श्राद्ध एवं पितृ तर्पण का वैदिक अनुष्ठान
16+ वर्षों का अनुभव · M.A. संस्कृत · काशी की वैदिक परंपरा · Online & Offline Services
पितृ दोष निवारण पूजा पूर्वजों की अतृप्त आत्माओं को शांति देने, वंश में चले आ रहे दोषों को दूर करने एवं परिवार पर उनके आशीर्वाद को पुनर्स्थापित करने हेतु किया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी से अभी परामर्श लें — Online एवं Offline दोनों विकल्प उपलब्ध। मुहूर्त सीमित होने से जल्द संपर्क करें।
हिंदू धर्म एवं वैदिक ज्योतिष में पितृ दोष एक अत्यंत महत्वपूर्ण दोष माना गया है जो तब उत्पन्न होता है जब पूर्वजों की आत्माओं को उचित श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान नहीं मिलता। यह दोष कुंडली में नवम भाव, पंचम भाव, सूर्य एवं चंद्रमा की स्थिति से प्रकट होता है।
पितृ दोष निवारण पूजा एक समग्र वैदिक अनुष्ठान है जिसमें पितरों का तर्पण, श्राद्ध विधि, पिंडदान, नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध एवं पितृ स्तोत्र के माध्यम से पूर्वजों की आत्माओं को शांति प्रदान की जाती है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह पूजा पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने एवं वंश में आ रही बाधाओं को दूर करने का सर्वोत्तम माध्यम है।
शास्त्रों में कहा गया है — "पितृ प्रसादेन सर्वं सिद्ध्यति" — अर्थात पितरों की प्रसन्नता से सभी कार्य सिद्ध होते हैं। जब पितृ दोष होता है तो वंश में संतान प्राप्ति में बाधा, विवाह में देरी, आर्थिक अवरोध एवं परिवार में कलह जैसी समस्याएँ आती हैं।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी इस संपूर्ण प्रक्रिया को काशी की वैदिक परंपरा एवं M.A. संस्कृत की विद्वत्ता के अनुसार संपन्न कराते हैं। संकल्प से लेकर पिंडदान, तर्पण एवं पूर्णाहुति तक — प्रत्येक चरण शास्त्रोक्त क्रम में किया जाता है।
Online Pitr Dosh Nivaran Puja की सुविधा के माध्यम से पंडित श्रीकांत तिवारी जी देश-विदेश के श्रद्धालुओं को यह अनुष्ठान घर बैठे संपन्न करवाने की सेवा प्रदान करते हैं। Live Streaming, Sankalp एवं Prasad Delivery के माध्यम से यह अनुष्ठान पूर्णतः प्रामाणिक रूप से किया जाता है।
यह अनुष्ठान वैदिक पितृ-शांति परंपरा पर आधारित है। प्रत्येक तत्व का शास्त्रीय महत्व है।
वैदिक परंपरा में पितृ-शांति को जीवन के सर्वोच्च धर्म-कर्तव्यों में माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार मनुष्य पर तीन ऋण होते हैं — देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण। पितृ दोष निवारण पूजा से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है एवं जीवन में उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पितृ दोष पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है। शास्त्रोक्त पितृ दोष निवारण पूजा से न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी पूर्वजों का आशीर्वाद स्थापित होता है।
जिन पूर्वजों को उचित श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान नहीं मिला, उनकी आत्माएँ अतृप्त रहती हैं। यह पूजा उन आत्माओं को शांति प्रदान करती है एवं उनकी सद्गति सुनिश्चित करती है।
कुंडली में नवम भाव, पंचम भाव, सूर्य-चंद्र की कमजोर स्थिति एवं राहु-केतु का अशुभ संयोग पितृ दोष को इंगित करता है। यह पूजा इन दोषों को शांत करती है।
पितृ दोष के कारण घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। पितृ दोष निवारण पूजा से घर का वातावरण शुद्ध एवं सात्विक बनता है एवं सकारात्मकता का संचार होता है।
जब पितर प्रसन्न होते हैं तो वे वंश को दीर्घायु, स्वास्थ्य, संतान-सुख, धन एवं समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यह पूजा उनकी प्रसन्नता का सर्वोत्तम माध्यम है।
जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में यह अनुष्ठान विशेष रूप से फलदायी होता है।
प्रत्येक वर्ष भाद्रपद-अश्विन माह में आने वाला पितृ पक्ष पितरों की पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय है। इस अवधि में पितृ दोष निवारण पूजा करवाना अत्यंत फलदायी होता है।
जब अनेक प्रयासों के बाद भी विवाह न हो रहा हो, रिश्ते टूट रहे हों या वैवाहिक जीवन में कलह हो — तब पितृ दोष की संभावना अधिक होती है।
संतान प्राप्ति में कठिनाई, गर्भपात की पुनरावृत्ति या संतान का स्वास्थ्य ठीक न रहना पितृ दोष का स्पष्ट संकेत हो सकता है।
कड़ी मेहनत के बाद भी धन न रुकना, व्यापार में घाटा या अचानक आर्थिक संकट आना पितृ दोष के प्रभाव का संकेत हो सकता है।
घर के किसी सदस्य को दीर्घकालिक बीमारी, उपचार का प्रभाव न होना या घर में बार-बार अस्वस्थता का माहौल बनना पितृ दोष से जुड़ा हो सकता है।
परिवार में निरंतर विवाद, भाई-बहनों में मतभेद, माता-पिता के साथ संबंधों में कड़वाहट या घर में हमेशा नकारात्मक माहौल होने पर यह पूजा लाभदायक है।
प्रत्येक अमावस्या पितरों को समर्पित होती है। सूर्य या चंद्र ग्रहण के पश्चात पितृ तर्पण एवं पूजा करवाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
यदि ज्योतिषी ने कुंडली में पितृ दोष की पुष्टि की हो — नवम भाव में राहु-केतु, सूर्य-शनि युति, या पंचम भाव पीड़ित हो — तो तुरंत यह पूजा करवाएँ।
नए मकान में प्रवेश से पूर्व पितृ दोष निवारण पूजा करवाने से घर का वातावरण शुद्ध होता है एवं पूर्वजों का आशीर्वाद नए घर पर बना रहता है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, ये समस्याएँ अक्सर पितृ दोष का संकेत देती हैं।
लंबे समय तक संतान न होना, बार-बार गर्भपात या संतान का कमजोर स्वास्थ्य — ये सभी पितृ दोष के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। पितृ दोष निवारण पूजा से पंचम भाव की शुद्धि होती है।
अच्छे रिश्ते आकर टूट जाना, विवाह में बार-बार देरी होना, या विवाह के बाद भी वैवाहिक जीवन में सुख न मिलना पितृ दोष से जुड़ी समस्याएँ हो सकती हैं।
कमाई होती है पर संचय नहीं होता, अचानक धन-हानि, व्यापार में अकारण घाटा — ये संकेत पितरों की नाराजगी का परिणाम हो सकते हैं। पितृ प्रसाद से आर्थिक स्थिरता आती है।
घर में किसी न किसी सदस्य का बीमार रहना, उपचार से लाभ न होना, या वही रोग बार-बार लौटना — ये लक्षण पितृ दोष की ओर संकेत करते हैं।
नींद में पूर्वजों का दिखना, डरावने स्वप्न आना, बिना कारण मानसिक भय या उदासी — ये पितरों के संपर्क के संकेत हो सकते हैं। पितृ शांति पूजा से राहत मिलती है।
कड़ी मेहनत के बावजूद करियर में अपेक्षित उन्नति न मिलना, नौकरी छूट जाना या व्यवसाय में अवरोध — ये पितृ दोष से जुड़ी बाधाएँ हो सकती हैं।
भाई-बहनों में संपत्ति विवाद, परिवार में बार-बार झगड़े, या संयुक्त परिवार का टूटना — ये पितृ असंतुष्टि के संकेत माने जाते हैं।
परिवार में अकाल मृत्यु का इतिहास, दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति या परिवार पर बार-बार विपत्ति आना पितृ दोष का गंभीर लक्षण हो सकता है जिसके लिए नारायण बलि या त्रिपिंडी श्राद्ध आवश्यक हो सकता है।
यह अनुष्ठान जीवन के हर पक्ष को पूर्वजों के आशीर्वाद से सुसज्जित करता है।
शास्त्रोक्त पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध से पूर्वजों की आत्माओं को मोक्ष की दिशा में गति मिलती है एवं वे वंश पर अपना दिव्य आशीर्वाद बनाए रखते हैं।
पितृ दोष के निवारण से पंचम भाव शुद्ध होता है, संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं एवं संतान का स्वास्थ्य एवं भविष्य उज्ज्वल होता है।
पितरों की कृपा से धन-संचय की बाधाएँ दूर होती हैं, व्यापार में स्थिरता आती है एवं परिवार में आर्थिक समृद्धि का वातावरण बनता है।
पितृ दोष निवारण से विवाह में आ रही बाधाएँ समाप्त होती हैं, अच्छे जीवनसाथी का योग बनता है एवं वैवाहिक जीवन में सुख-सामंजस्य स्थापित होता है।
पितरों की शांति से बुरे स्वप्न बंद होते हैं, मन में व्याप्त अकारण भय दूर होता है एवं जीवन में मानसिक स्थिरता एवं आत्मविश्वास आता है।
पितृ दोष निवारण से घर में बार-बार आने वाली बीमारियों से मुक्ति मिलती है, दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं में सुधार होता है एवं परिवार में स्वास्थ्य-लाभ का वातावरण बनता है।
पितरों के आशीर्वाद से परिवार में प्रेम, एकता एवं सहयोग का वातावरण बनता है। भाई-बहनों में कलह समाप्त होती है एवं संयुक्त परिवार में शांति स्थापित होती है।
पितृ कृपा से करियर में रुकी हुई तरक्की मिलती है, व्यापार में सफलता आती है एवं जीवन में स्पष्ट दिशा एवं लक्ष्य-प्राप्ति का मार्ग खुलता है।
पितृ दोष निवारण से आने वाली पीढ़ियों पर भी इसका सुरक्षात्मक प्रभाव पड़ता है। वंश में दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्रवाहित होता है।
पितरों की शांति से साधक की आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है। पूजा-पाठ में मन लगता है, ध्यान में गहराई आती है एवं जीवन में धर्म के प्रति रुचि बढ़ती है।
इस पूजा से तीनों पितृ ऋणों में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है जो व्यक्ति को पूर्ण रूप से मोक्ष-मार्ग पर चलने हेतु स्वतंत्र करती है।
पितृ दोष निवारण पूजा से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, वास्तु दोषों का प्रभाव कम होता है एवं घर में सात्विक एवं दिव्य ऊर्जा का संचार होता है।
ये सामान्य आध्यात्मिक अभ्यास हैं जो पितरों की प्रसन्नता के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
प्रत्येक अमावस्या को पितरों के लिए काले तिल मिले जल से तर्पण करें। पितृ गायत्री मंत्र का जाप करें। यह सरल परंतु अत्यंत प्रभावशाली उपाय माना जाता है।
नित्य पितृ स्तोत्र एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, भगवान विष्णु पितरों के स्वामी हैं और उनकी स्तुति से पितर शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
प्रतिदिन कौवे को रोटी अर्पण करें। शास्त्रों में कौवे को पितरों का प्रतीक माना गया है। पितृ पक्ष में यह उपाय विशेष रूप से फलदायी होता है।
शनिवार को पीपल वृक्ष की जड़ में जल एवं काले तिल अर्पण करें। पीपल में पितरों का वास माना गया है। दीपक जलाकर पितरों से क्षमा-याचना करें।
माता-पिता की पुण्य-तिथि पर ब्राह्मण भोजन एवं दान करें। गाय को हरा चारा खिलाएँ। अन्न दान एवं वस्त्र दान से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
यदि संभव हो तो गया (बिहार), हरिद्वार, प्रयागराज या पुष्कर में जाकर पिंडदान एवं तर्पण करवाएँ। ये स्थान पितृ-मोक्ष के लिए विशेष रूप से पवित्र माने गए हैं।
पितृ पक्ष में गरुड़ पुराण का पाठ करवाएँ या सुनें। इससे पितरों की गति सुनिश्चित होती है एवं परिवार में मृत्यु के पश्चात की विधियों के प्रति जागरूकता आती है।
प्रतिदिन पूजा में पितरों का स्मरण करें, उनकी तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ एवं उनसे आशीर्वाद माँगें। यह सरल परंतु प्रभावशाली दैनिक अभ्यास पितरों को प्रसन्न रखता है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी को पितृ दोष निवारण पूजा, श्राद्ध विधि, पिंडदान एवं पितृ-शांति अनुष्ठानों में 16 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव प्राप्त है। उनके मार्गदर्शन से सैकड़ों परिवारों ने पितृ कृपा प्राप्त की है।
M.A. संस्कृत की उच्च शिक्षा के साथ उन्होंने वैदिक पितृ-कर्म, श्राद्ध-विधान, तर्पण-मंत्र एवं नारायण बलि की गहन शिक्षा प्राप्त की है। शास्त्रों की प्रामाणिक समझ उनकी सेवाओं को विशेष विश्वसनीय बनाती है।
काशी (वाराणसी) भारत का सर्वाधिक प्रतिष्ठित पितृ-कर्म केंद्र है। पंडित जी ने काशी की इस महान परंपरा से दीक्षा लेकर पितृ दोष निवारण की समग्र विद्या अर्जित की है।
Online Pitr Dosh Nivaran Puja की सुविधा से देश-विदेश के श्रद्धालु भी इस अनुष्ठान का लाभ उठा सकते हैं। Live Streaming, Video Call के माध्यम से संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी रूप से संपन्न होती है।
प्रत्येक जातक की कुंडली एवं परिवार की परिस्थिति भिन्न होती है। पंडित जी पूजा के पूर्व एवं पश्चात व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श प्रदान करते हैं — क्या नारायण बलि आवश्यक है, क्या त्रिपिंडी श्राद्ध करना होगा — यह सब बताते हैं।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी प्रत्येक चरण को शास्त्रोक्त विधि से संपन्न कराते हैं।
पूजा के प्रारंभ से पूर्व पंडित श्रीकांत तिवारी जी साधक की जन्म-कुंडली का विश्लेषण करते हैं। नवम भाव, पंचम भाव, सूर्य-चंद्र की स्थिति एवं राहु-केतु के संयोग से पितृ दोष की पुष्टि की जाती है एवं तदनुसार उचित अनुष्ठान का निर्धारण होता है।
साधक के नाम, गोत्र, वंश-परंपरा एवं पूर्वजों के नाम सहित विधिपूर्वक संकल्प लिया जाता है। यह संकल्प पूजा का आधार है। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं क्षमा-भाव का यह सर्वप्रथम औपचारिक निवेदन है।
पूजन के लिए पवित्र स्थान की शुद्धि, भगवान विष्णु एवं पितृ देव का आह्वान तथा पूजन-सामग्री का विधिपूर्वक संयोजन किया जाता है। काले तिल, कुशा, जल एवं पितृ-विशेष सामग्री शास्त्रानुसार रखी जाती है।
कुशा एवं काले तिल मिले जल से पितरों को तर्पण दिया जाता है। तीन पीढ़ियों के पितरों — पिता, पितामह (दादा) एवं प्रपितामह (परदादा) — के साथ मातृ-पक्ष के पितरों का भी तर्पण शास्त्रोक्त क्रम से संपन्न होता है।
जौ के आटे, तिल, घी एवं शहद से पिंड बनाए जाते हैं एवं पितरों को समर्पित किए जाते हैं। यह पिंडदान पितरों की भूख शांत करता है एवं उनकी आत्मा को तृप्ति प्रदान करता है। यह पितृ कर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है।
पितृ स्तोत्र, पितृ गायत्री मंत्र एवं विष्णु सहस्रनाम का शास्त्रीय उच्चारण के साथ जाप किया जाता है। भगवान विष्णु का विशेष पूजन होता है क्योंकि वे पितरों के स्वामी एवं सद्गति के दाता माने गए हैं।
हवन-कुंड में अग्नि प्रज्वलित कर पितृ मंत्रों के साथ तिल, घी, जौ एवं पितृ-विशेष सामग्री की आहुतियाँ दी जाती हैं। अग्नि को पितरों तक संदेश एवं भोजन पहुँचाने का माध्यम माना गया है।
ब्राह्मणों को भोजन एवं दक्षिणा दी जाती है। वस्त्र, अनाज एवं आवश्यक वस्तुओं का दान किया जाता है। यह दान पितरों तक पहुँचता है एवं उनकी तृप्ति सुनिश्चित करता है।
हवन की पूर्णाहुति के बाद पितरों से क्षमा-याचना की जाती है, उनसे आशीर्वाद माँगा जाता है एवं प्रसाद वितरण होता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी पूजा के पश्चात भविष्य में पालन करने योग्य उपाय एवं मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं।
पितृ दोष निवारण पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धा, कृतज्ञता एवं प्रेम व्यक्त करने का पवित्र माध्यम है। जब हम अपने पितरों को तर्पण, पिंडदान एवं श्राद्ध द्वारा तृप्त करते हैं, तो वे हमारे वंश पर दीर्घायु, स्वास्थ्य, समृद्धि एवं मोक्ष का आशीर्वाद बरसाते हैं। यह शास्त्रोक्त कर्म जीवन की हर बाधा को दूर कर सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।
पितृ दोष वह स्थिति है जब पूर्वजों की आत्माएँ उचित श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान न मिलने के कारण अतृप्त रहती हैं और वंश पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। वैदिक ज्योतिष में यह दोष तब माना जाता है जब कुंडली के नवम भाव में राहु-केतु की स्थिति हो, सूर्य-शनि एक साथ हों, या पंचम भाव पीड़ित हो। अकाल मृत्यु, अपूर्ण इच्छाओं के साथ मृत्यु, या पूर्वजों के श्राद्ध-कर्म में लापरवाही से भी यह दोष उत्पन्न होता है।
पितृ दोष निवारण पूजा के लाभ अत्यंत व्यापक हैं। इससे पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है, संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं, विवाह में शुभ संयोग बनता है, आर्थिक स्थिरता आती है, परिवार में सुख-शांति स्थापित होती है एवं मानसिक शांति मिलती है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, यह पूजा वंश की तीन पीढ़ियों तक लाभकारी प्रभाव डालती है।
पितृ दोष निवारण पूजा सामान्यतः एक दिन में संपन्न होने वाला अनुष्ठान है जिसमें लगभग पाँच से सात घंटे का समय लगता है। इसमें संकल्प, पितृ तर्पण, पिंडदान, पितृ स्तोत्र जाप, हवन एवं ब्राह्मण भोजन सम्मिलित होते हैं। यदि नारायण बलि या त्रिपिंडी श्राद्ध की आवश्यकता हो तो यह दो से तीन दिनों का अनुष्ठान हो सकता है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी प्रत्येक चरण को शास्त्रोक्त क्रम से संपन्न कराते हैं।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, Online Pitr Dosh Nivaran Puja पूर्णतः प्रभावशाली होती है। वैदिक शास्त्रों में संकल्प एवं श्रद्धा को सर्वाधिक महत्व दिया गया है — न कि केवल शारीरिक उपस्थिति को। Online Puja में साधक का संकल्प उनके नाम, गोत्र एवं पूर्वजों के नाम सहित विधिपूर्वक लिया जाता है। Live Streaming के माध्यम से साधक पूरे अनुष्ठान का साक्षी बनते हैं। मंत्रों की शक्ति स्थान-निरपेक्ष होती है।
पितृ दोष निवारण पूजा के लिए पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का समय सर्वोत्तम माना जाता है जो भाद्रपद माह की पूर्णिमा से अश्विन माह की अमावस्या (महालया) तक होता है। इसके अतिरिक्त अमावस्या, सोमवती अमावस्या, मकर संक्रांति एवं ग्रहण के पश्चात भी यह पूजा विशेष रूप से फलदायी होती है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी ज्योतिष के आधार पर प्रत्येक साधक के लिए उचित मुहूर्त निर्धारित करते हैं।
नारायण बलि एक विशेष अनुष्ठान है जो तब किया जाता है जब परिवार में किसी की अकाल मृत्यु (दुर्घटना, आत्महत्या, डूबने से मृत्यु) हुई हो। इसमें उस आत्मा को मोक्ष देने के लिए विशेष विधि से पूजा होती है। त्रिपिंडी श्राद्ध तब किया जाता है जब तीन पीढ़ियों के श्राद्ध नहीं हुए हों। पंडित श्रीकांत तिवारी जी कुंडली एवं परिवार की परिस्थिति के अनुसार सही अनुष्ठान का निर्धारण करते हैं।
पितृ दोष निवारण पूजा में प्रमुख सामग्री में काले तिल, कुशा, जौ का आटा, घी, शहद, दूध, गंगाजल, पंचामृत, काले वस्त्र, पितृ यंत्र, पंचमेवा, सफेद पुष्प, तुलसी, नारियल, धूप-दीप, हवन सामग्री एवं ब्राह्मण भोजन की व्यवस्था शामिल है। पंडित श्रीकांत तिवारी जी स्वयं सामग्री की व्यवस्था करते हैं। पूजा की सामग्री की पूर्ण सूची परामर्श के दौरान प्रदान की जाती है।
पितृ ऋण (कर्ज) वह स्वाभाविक दायित्व है जो प्रत्येक मनुष्य पर अपने माता-पिता एवं पूर्वजों के प्रति होता है। यह ऋण श्राद्ध, तर्पण एवं माता-पिता की सेवा से चुकाया जाता है। पितृ दोष उस स्थिति को कहते हैं जब यह ऋण लंबे समय तक न चुकाया गया हो एवं पूर्वजों की आत्माएँ अतृप्त होकर वंश को प्रभावित कर रही हों। पितृ दोष निवारण पूजा से दोनों का निवारण होता है।
हाँ, पंडित श्रीकांत तिवारी जी के अनुसार, पितृ दोष निवारण पूजा संतान प्राप्ति में अत्यंत सहायक होती है। कुंडली का पंचम भाव संतान का कारक है और जब पितृ दोष के कारण यह भाव पीड़ित होता है तो संतान प्राप्ति में कठिनाई आती है। पितृ शांति से पंचम भाव शुद्ध होता है, गर्भधारण की संभावना बढ़ती है एवं संतान स्वस्थ एवं दीर्घायु होती है।
पंडित श्रीकांत तिवारी जी से पितृ दोष निवारण पूजा बुक करना अत्यंत सरल है। आप +91 79995 48900 पर सीधे फोन या WhatsApp संपर्क कर सकते हैं। वे आपकी कुंडली, परिवार की परिस्थिति एवं उपयुक्त मुहूर्त के आधार पर पूजा की योजना बनाते हैं। Online Pitr Dosh Puja के लिए Video Call पर परामर्श उपलब्ध है। पूजा का संकल्प आपके नाम, गोत्र एवं पूर्वजों के नाम के साथ लिया जाता है। Offline Puja के लिए Indore एवं आसपास के क्षेत्रों में सुविधा उपलब्ध है।
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